इस्लामाबाद: भारत के सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत पाकिस्तान के पानी पर रोक लगाकर देश की 80 फीसदी आबादी के लिए खतरा पैदा कर रहा है। हाल के दिनों में पाकिस्तान की बौखलाहट में तेजी आई है और उसके मंत्रियों की तरफ से पानी को लेकर युद्ध की धमकियां दी जा रही हैं। इसकी वजह भारत के हिस्से में पश्चिमी नदियों पर बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी है, जिसने पाकिस्तान के अंदर डर पैदा कर दिया है।
भारत ने पश्चिमी नदियों की कई परियोजनाओं पर काम तेज किया है, जिसमें चिनाब-व्यास लिंक टनल और रणवीर नहर के विस्तार जैसे प्रोजेक्ट अहम है। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान के साथ नदियों के हाइड्रोलॉजिकल डेटा को भी साझा करना बंद कर दिया है। इससे पाकिस्तान को नदियों में पानी के बहाव में वृद्धि और कमी की जानकारी नहीं मिल रही है।पाकिस्तान को सता रहा भारत का डर
पाकिस्तान ने बार-बार भारतीय परियोजनाओं को लेकर रोना रोया है, लेकिन उसका असल डर इससे आगे का है। इस्लामाबाद को डर है कि भारत ऊपरी इलाकों में पानी पर नियंत्रण कर सकता है। हाल ही में भारत के जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा था कि 2028 तक पाकिस्तान के लिए पानी की एक बूंद नहीं पहुंचने दी जाएगी। इस बयान ने पाकिस्तान के अंदर भारतीय परियोजनाओं को लेकर डर पैदा किया है।
सिंधु जल संधि पर भारत के कड़े रुख के बाद पाकिस्तान के अंदर इसके लिए जवाबी उपायों पर बहस जारी है। इन उपायों में राजनीतिक पहल, कूटनीतिक अभियान और रणनीतिक रक्षा तंत्र शामिल हैं, ताकि पानी के मुद्दे पर नई दिल्ली की मार से बच सके। पाकिस्तान में राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ने इस बात पर बार-बार जोर दिया है कि पानी का मुद्दा उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। पाकिस्तान के लिए यह अस्तित्व का सवाल है।










































