पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। नगर मुख्यालय से लगभग ५ किमी की दूरी पर स्थित ग्राम ददिया से देवरी को जोडऩे वाला मुख्य मार्ग वर्तमान में बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। सर्राटी नदी के किनारे से गुजरा यह मार्ग पिछले वर्ष हुई भारी बारिश और बाढ़ के कारण मिट्टी के कटाव की भेंट चढ़ गया था। स्थिति यह है कि सडक़ का एक बड़ा हिस्सा नदी में जा चुका है और अब यहां केवल संकरा रास्ता ही बचा है। जिस स्थान से सडक़ के नीचे की मिट्टी धसक चुकी है उस स्थान पर कोई संकेतक बोर्ड भी नही लगा है। जबकि इस मार्ग से आधा दर्जन से अधिक ग्रामों ग्रामीणजन एवं राहगीर आवागमन करते है। सडक़ का खस्ताहाल हो जाने के कारण हर समय बड़ी दुर्घटना होने की संभावना बनी हुई है। वहीं विधायक श्रीमती अनुभा मुंजारे के प्रयासों से इस सडक़ की पूर्व में स्वीकृति दिलवाई है और इस मार्ग का निर्माण के लिए ४३६.५० करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। लेकिन स्वीकृति मिलने के करीब ४ माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य शुरू नही हुआ है, जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है। यदि आगामी मानसून (बरसात) के पूर्व इस मार्ग का निर्माण कार्य शुरू नही किया गया तो सडक़ धस जायेगी जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क पूरी तरह से कट जायेगा। ऐसी स्थिति में सभी को आवागमन करने में परेशानी होगी और जिस स्थान से सडक़ कट चुकी है उसके सामने स्थित मकान में बरसात के दिनों में पानी पहुंच सकता था जिससे मकान को भी काफी नुकसान होने की संभावना बनी हुई है। ग्रामीणजन एवं राहगीरों ने शासन-प्रशासन से ददिया से देवरी पहुंच मार्ग स्वीकृत हो चुकी है तो जल्द निर्माण करवाने की मांग शासन-प्रशासन से की है।
महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग, दुर्घटना को दे रहा आमंत्रण
आपकों बता दे कि ददिया से देवरी पहुंच मार्ग का विगत वर्ष पूर्व सडक़ विभाग के द्वारा डामरीकरण सडक़ का निर्माण किया गया था और यह मार्ग सर्राटी नदी के समीप से गुजरी है। नदी में बाढ़ आने पर तेज पानी के बहाव में सडक़ किनारे की मिट्टी धीरे-धीरे धसकने लगी है। वहीं पिछले वर्ष सर्राटी नदी में बाढ़ आने पर सडक़ का एक हिस्सा आधा से अधिक बह चुका है। लेकिन अब तक उसका मरम्मत कार्य नही करवाया गया है न ही नवीन सडक़ का निर्माण किया गया है। जबकि ददिया से देवरी को जोडऩे वाला यह मार्ग क्षेत्र के लिए लाइफलाइन माना जाता है। रोजाना इस मार्ग से स्कूली बच्चें, किसान और राहगीर गुजरते हैं। यह मार्ग न केवल दो गांवों को जोड़ता है, बल्कि दर्जनों अन्य ग्रामीण अंचलों के लिए कम दूरी का रास्ता प्रदान करता है। वर्तमान में सडक़ आधी बह जाने के कारण यहां हर समय बड़ी दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है। रात के अंधेरे में यहां से गुजरना जान जोखिम में डालने के समान है। लेकिन इस समस्या की ओर जिम्मेदारों के द्वारा कोई ध्यान नही दिया जा रहा है।
विधायक ने दिलाई स्वीकृति, फिर भी काम ठप
ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सडक़ की समस्या की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक को पूर्व में अवगत करवाया था। विधायक के विशेष प्रयासों और शासन स्तर पर की गई पैरवी के बाद इस मार्ग के नवीन निर्माण के लिए बजट और तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। लेकिन विडंबना यह है कि स्वीकृति मिले कई माह बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका है। विभाग की इस कछुआ चाल से जनता में भारी नाराजगी व्याप्त है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि अगर जून की बारिश से पहले रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) और सडक़ का निर्माण नहीं हुआ, तो जो बचा रास्ता है वह भी नदी में बह जायेगा। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को अधिक दुरी तय कर आवागमन करना पड़ेगा। सडक़ निर्माण के लिए शासन-प्रशास से बार-बार गुहार लगाने के बाद सडक़ निर्माण स्वीकृत हुई है फिर निर्माण कार्य में देरी क्यों हो रही है। यदि बारिश के पहले काम शुरू नही हुआ तो आवागमन पूर्णत: ठप हो जायेगा।










































