जबलपुर । स्कूली बच्चों के भारी बस्तों को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक दबाव को ध्यान में रखते हुए बाल संरक्षण आयोग तथा लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने जिला प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं।नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई भी की जाएगी
अधिकारियों से कहा गया है कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी का पालन सुनिश्चित कराया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।आयोग ने स्पष्ट किया है कि पहली कक्षा के छात्र का स्कूल बैग निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। वहीं प्री-प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों के लिए बैग ले जाना अनिवार्य नहीं माना गया है।
शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर
अधिकारियों का कहना है कि कम उम्र में अधिक वजन वाले बस्ते बच्चों की रीढ़, कंधों और शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। साथ ही इससे मानसिक तनाव भी बढ़ता है।समग्र शिक्षा अभियान और लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से जिला शिक्षा अधिकारियों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे स्कूलों में जाकर बच्चों के बस्तों का वजन जांचें।
औपचारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई
निरीक्षण के दौरान यह जानकारी भी जुटाने को कहा गया है कि अलग-अलग कक्षाओं के छात्रों के बैग निर्धारित मानकों के अनुसार हैं या नहीं। हालांकि अभी तक किसी स्कूल पर औपचारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
छुट्टियों के बीच जांच प्रक्रिया पर सवाल
इधर, स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू होने के बाद जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि कई स्थानों पर बिना वास्तविक निरीक्षण के ही रिपोर्ट भेजे जाने की संभावना हो सकती है।
निजी स्कूलों पर आयोग की नजर
बाल संरक्षण आयोग ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि कुछ निजी स्कूल अब तक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं और छोटे बच्चों पर जरूरत से ज्यादा किताबें व कॉपियां लाने का दबाव बनाया जा रहा है। आयोग ने प्रशासन से कहा है कि बच्चों के हित में इस व्यवस्था को गंभीरता से लागू किया जाए।









































