होर्मुज स्ट्रेट पर फिर बढ़ा तनाव, US ने ईरानी रॉकेट लॉन्चर किए तबाह; ईरान ने किया पलटवार

0

अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया। यह करीब एक महीने बाद अमेरिका की पहली बड़ी सैन्य कार्रवाई है। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी देते हुए जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागने का दावा किया।अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों से जारी सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। रविवार (स्थानीय समय) को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में स्थित ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया। यह करीब एक महीने के विराम के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिका की पहली बड़ी सैन्य कार्रवाई बताई जा रही है। ईरान ने हमले को घातक करार दिया और जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी। जिससे पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध तेज होने की आशंका बढ़ गई है।

समुद्री सुरंगें बिछाने की तैयारी में था ईरान

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवान होर्मुज जलडमरूमध्य में रॉकेटों के जरिए समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछाने की तैयारी कर रहे थे। जिसके बाद अमेरिकी सेना ने इन रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने पिछले हफ्ते ही होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के रास्ते से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का काम पूरा किया था।

ईरान का पलटवार: जॉर्डन में दागीं मिसाइलें

ईरानी मीडिया ने लारक द्वीप के पास जोरदार धमाकों की पुष्टि की है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बताया कि हमले में उनके कुछ लड़ाके और नागरिक हताहत हुए हैं। अमेरिकी हमले के तुरंत बाद ईरानी सरकारी टेलीविजन ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के दृश्य दिखाए गए। जॉर्डन की सेना के अनुसार, सोमवार (स्थानीय समय) तड़के उसके हवाई क्षेत्र में घुसी 8 ईरानी मिसाइलों को मार गिराया गया। वहीं ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेबी ने अमेरिकी हमले को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “घातक भूल” बताया। उन्होंने कहा कि दुश्मन को इसके गंभीर सैन्य और आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।एक महीने बाद अमेरिका ने किया हमला

अमेरिका ने इससे पहले 29 जुलाई को ईरान पर हमला करने की पुष्टि की थी। उस समय अमेरिकी सेना ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के तटीय निगरानी और रक्षा ठिकानों समेत कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर हमला करने की घोषणा की थी। इसके बाद 1 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देशों कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की अपील पर नए हमलों को रोकने की बात कही थी। अमेरिका ने हाल में सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाने की बात कही थी।

लंबे युद्ध से अमेरिकी हथियारों के भंडार पर भी दबाव

ईरान के साथ महीनों से चल रहे संघर्ष के कारण अमेरिका के हथियारों और सैन्य संसाधनों पर दबाव बढ़ने की चिंता भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय तक युद्ध जारी रहने से दुनिया के दूसरे हिस्सों में अमेरिकी सैन्य तैयारियों पर प्रभाव पड़ सकता है। ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान हुआ है। वहीं ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्ध के कारण देश को करीब 270 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नुकसान हुआ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की आवाजाही आम तौर पर इसी रास्ते से होती है। ईरान इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है। युद्ध के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले तेल और LNG जहाजों की संख्या में काफी कमी आई है। ट्रंप का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला हुआ है और पिछले सप्ताह 24 जहाज यहां से गुजरे। हालांकि, युद्ध से पहले यहां हर दिन करीब 130 जहाज गुजरते थे। अमेरिकी नौसेना की निगरानी में काम कर रहे एक बहुराष्ट्रीय गठबंधन ने भी कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों की आवाजाही अभी कम स्तर पर है।

हमले के बाद तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिकी हमले की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ गई। अमेरिकी क्रूड की कीमत करीब 1.8 फीसदी बढ़कर 84.94 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.9 फीसदी बढ़कर 89.79 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ट्रंप प्रशासन सैन्य कार्रवाई के बजाय कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति पर विचार कर रहा था।

इस बीच ब्रिटिश सेना से जुड़े एक समुद्री निगरानी संगठन ने बताया कि शनिवार को ओमान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर जहाज को किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल से नुकसान पहुंचा। घटना में किसी के हताहत होने या पर्यावरण को नुकसान की खबर नहीं है। अमेरिकी सेना के अनुसार, रविवार तक उसने 83 व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदला और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के तहत तीन जहाजों को निष्क्रिय किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here