प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की PM सनाए ताकाइची ने 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद गुरुवार 2 जुलाई, 2026 को एक साझा वक्तव्य जारी किया है। इस वक्तव्य में कहा गया है कि भारत और जापान ने अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने का बड़ा फैसला किया है। जापान की तरफ से भारत में निवेश से जुड़े बड़े ऐलान किए गए हैं।
दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रक्षा, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और अत्याधुनिक तकनीकों को लेकर कई अहम समझौते किए हैं। खासतौर पर दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन (करीब 69 अरब डॉलर) के जापानी निवेश को आकर्षित करने और भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया है।
साझा वक्तव्य के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच करीब 120 नए कारोबारी समझौते हुए हैं, जिनके जरिए भारत में 10 अरब डॉलर से अधिक का नया जापानी निवेश आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि भारत में लगातार हो रहे आर्थिक सुधारों और कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) ने जापानी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में भारत और जापान के बीच करीब 120 नए बिजनेस एग्रीमेंट हुए हैं। इन समझौतों से भारत में 10 अरब डॉलर से अधिक का नया निवेश आने की उम्मीद है। नई दिल्ली में आयोजित जापान-इंडिया इकोनॉमिक फोरम में 150 से ज्यादा जापानी कंपनियां शामिल हुईं। इनमें सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, AI और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं पर चर्चा हुई। जापानी कंपनियां भारत में सेमीकंडक्टर मटेरियल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बायोगैस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
1. भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य
शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा ऐलान अगले दशक के लिए निवेश का रोडमैप रहा। भारत और जापान ने 10 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश का लक्ष्य तय किया है। साथ ही भारत में जापानी कंपनियों की संख्या भी दोगुनी करने की योजना बनाई गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के वित्तीय नियामकों के बीच हुआ नया समझौता निवेश और पूंजी के प्रवाह को आसान बनाएगा। इससे भारत में जापानी निवेशकों के लिए कारोबार का माहौल और बेहतर होगा।
2. AI और नई तकनीकों में होगी गहरी साझेदारी
भारत और जापान ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर संयुक्त बयान जारी किया और इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए अलग समझौते पर हस्ताक्षर किए।
दोनों देश AI के अलावा सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, सूचना एवं संचार तकनीक (ICT) और मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने पर भी साथ काम करेंगे। इसका मकसद भविष्य की तकनीकों में चीन पर निर्भरता कम करना और भरोसेमंद सप्लाई नेटवर्क तैयार करना है।
3. रक्षा क्षेत्र में पहली संयुक्त परियोजना
भारत और जापान के रक्षा संबंधों में भी नया अध्याय जुड़ गया है। दोनों देशों ने पहली बार ‘नेवल रेडियो एंटीना यूनिकॉर्न (Naval Radio Antenna Unicorn)’ के संयुक्त विकास (Co-development) पर समझौता किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे रक्षा तकनीक साझेदारी में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और मजबूत होगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच इस समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है।
4. भारत में बनेंगे 1,000 बायोगैस प्लांट
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी दोनों देशों ने बड़ा फैसला लिया। भारत-जापान बायोगैस इनिशिएटिव के तहत देशभर में 1,000 बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस पहल से गांवों में रोजगार बढ़ेगा, किसानों की आय को सहारा मिलेगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा दोनों देशों ने धातु (Metals) और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी नया समझौता किया है।
5. सेमीकंडक्टर और सप्लाई चेन पर बड़ा फोकस
वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, फार्मास्युटिकल्स, क्लीन एनर्जी और डिजिटल टेक्नोलॉजी को रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा बनाया है। दोनों देशों का मानना है कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन बेहद अहम होगी। इसी दिशा में सेमीकंडक्टर निर्माण, दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता और उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing) में सहयोग बढ़ाया जाएगा।
भारत पर जापान का भरोसा लगातार बढ़ रहा
जापान भारत का पांचवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच जापान ने भारत में 48 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है। इस समय करीब 1,500 जापानी कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं। जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JETRO) के सर्वे के मुताबिक भारत में मौजूद 80 प्रतिशत से अधिक जापानी कंपनियां अगले एक-दो वर्षों में अपना कारोबार और बढ़ाना चाहती हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है। दोनों देशों का मानना है कि निवेश, तकनीक और रक्षा सहयोग बढ़ने से आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा।








































