तन और मन को स्वस्थ रखता है धातुओं का प्रयोग

0

प्रत्येक धातु का संबंध उससे संबंधित ग्रह से माना गया है। सूर्य ग्रह के प्रभाव के कारण स्वर्ण के आभूषणों की तासीर गर्म और चन्द्र ग्रह के प्रभाव के कारण चांदी की तासीर शीतल होती है।

लोहा शनि का प्रतिनिधित्व करता है, जब लोहे का छल्ला शनि की मध्यमा उंगली में शनिवार के दिन धारण किया जाता है, तो साढ़ेसाती, ढैय्या के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है।चांदी का सम्बंध सर्वप्रथम चन्द्रमा से माना गया है, चन्द्रमा की शीतलता चांदी धारण करके व्यक्ति को प्राप्त होती है, इसलिए नवजात शिशु को चांदी का चन्द्रमा बचपन में धारण कराया जाता है। मानसिक रूप से उलझे व्यक्तियों के लिए चांदी धातु से निर्मित मोती युक्त अर्द्धचन्द्रमा वरदान साबित होता है। चन्द्रमा मन का कारक है, इसलिए चन्द्रमा का धातु चांदी धारण करने से मन शांत रहता है।

रत्न भी तभी कार्य करते हैं, जब उन्हें उस ग्रह से सम्बंधित सही धातु में धारण किया जाए। अगर रत्न विपरीत धातु में बनवाकर धारण किया जाता है तो वह प्रभावशून्य हो जाता है। आयुर्वेद में स्वास्थ्य लाभ के लिए धातुओं की भस्म औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है। कन्या के विवाह में बाधा दूर करने के लिए स्वर्ण धातु से निर्मित छल्ला धारण कराया जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here