नगर पालिका के बहुचर्चित डीजल मामले ने फिर पकड़ी रफ्तार, जबलपुर में दर्ज हुए शिकायतकर्ताओं के बयान,

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नगर पालिका बालाघाट में कुछ माह पूर्व सामने आए बहुचर्चित डीजल व्यय और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ा यह मामला अब न्यायालय की सख्ती और नगरीय प्रशासन संचालनालय की सक्रियता के बाद फिर से जांच के केंद्र में आ गया है। गुरुवार 2 जुलाई को जबलपुर स्थित नगरीय प्रशासन संचालनालय में शिकायतकर्ताओं, नगर पालिका अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए गए। हालांकि, इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष भारती सुरजीत ठाकुर उपस्थित नहीं हुईं। बताया जा रहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से कुछ समय की मांग की है।

गौरतलब है कि नगर पालिका अध्यक्ष के विरुद्ध भाजपा के ही कुछ पार्षदों एवं पार्षद प्रतिनिधियों ने डीजल खर्च, प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। मामला न्यायालय तक पहुंचा था, जहां से राज्य शासन को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। न्यायालय के आदेश के बाद शासन ने जांच समिति का गठन किया, जिसमें बालाघाट के तत्कालीन ज्वाइंट कलेक्टर राहुल नायक सहित नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया था। प्रारंभिक दौर में इस मामले को लेकर नगर पालिका की राजनीति काफी गरमा गई थी। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। जांच समिति को लगभग 90 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ सकी। शिकायतकर्ताओं के बयान तक दर्ज नहीं हुए और मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ता नजर आने लगा था ।

अवमानना याचिका के बाद बढ़ी प्रशासनिक हलचल

शिकायतकर्ता एवं भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता केवल सोनेकर ने बीते दिनों बताया कि जब कई महीनों तक जांच में कोई प्रगति नहीं हुई तो उन्होंने पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय में अवमानना याचिका दायर कर यह प्रश्न उठाया गया कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद जांच समय पर पूरी क्यों नहीं की गई। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर एक बार फिर हलचल तेज हुई और नगरीय प्रशासन संचालनालय, जबलपुर से संबंधित सभी पक्षों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया।

शिकायतकर्ताओं ने पेश किए दस्तावेजी साक्य्

निर्धारित तिथि 2 जुलाई को भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता केवल सोनेकर, पार्षद सुधीर चिले, पार्षद प्रतिनिधि सौरभ जैन सहित अन्य शिकायतकर्ता जबलपुर पहुंचे। सभी ने अपने-अपने बयान दर्ज कराए तथा सूचना के अधिकार (आरटीआई) सहित अन्य माध्यमों से प्राप्त दस्तावेजी साक्ष्य जांच अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए। बताया गया कि शिकायतकर्ताओं ने केवल डीजल खर्च ही नहीं, बल्कि नगर पालिका में हुए अन्य वित्तीय एवं प्रशासनिक मामलों से जुड़े दस्तावेज भी जांच समिति को सौंपे। जांच के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन करने के लिए नगर पालिका बालाघाट से प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी सूर्यप्रकाश उके, वाचस्पति त्रिपाठी तथा सेवानिवृत्त हो चुके पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारी बी.डी. कतरोलिया भी जबलपुर पहुंचे। अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का मिलान एवं सत्यापन किया।

नगर पालिका अध्यक्ष की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय

सूत्रों के अनुसार जांच प्रक्रिया के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष भारती सुरजीत ठाकुर को भी उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना था, लेकिन वे निर्धारित तिथि पर नहीं पहुंचीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से अतिरिक्त समय मांगा है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं और अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनका बयान कब दर्ज होगा।

पार्षद सुधीर चिले ने कही यह बात

पार्षद सुधीर चिले ने बताया कि उन्होंने जांच अधिकारियों के समक्ष सभी दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका में कई ऐसे खर्च किए गए, जिनकी आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने डीजल व्यय के अलावा अन्य वित्तीय मामलों से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच टीम को सौंपे हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

एक बार फिर गर्माई नगर पालिका की राजनीति

जांच प्रक्रिया दोबारा शुरू होने के बाद नगर पालिका की राजनीति फिर गर्मा गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। शहर में भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर जांच में क्या तथ्य सामने आएंगे और क्या शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह लंबित रह जाएगा। फिलहाल, जबलपुर में शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज होने के बाद जांच ने नया मोड़ ले लिया है। अब नगर पालिका अध्यक्ष सहित अन्य संबंधित पक्षों के बयान और जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि जांच में शिकायतों की पुष्टि होती है तो नगर पालिका प्रशासन में बड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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