वारासिवनी। शंकर साव पटेल शासकीय महाविद्यालय में ऊंची पैठ और राजनीतिक रसूख का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपए की ठगी करने वाले आरोपी को वारासिवनी पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफ लता हासिल की है। आरोपी प्रीतम डहरवाल को न्यायालय में पेश कर पुलिस ने ६ दिनों की रिमांड पर लिया है जिससे पूछताछ में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
यह है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार वार्ड नंबर एक निवासी प्रीतम पिता शीतल प्रसाद डहरवाल ४६ वर्ष वारासिवनी के द्वारा शंकरसाव पटेल शासकीय महाविद्यालय में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। जब शासन ने महाविद्यालय में आउटसोर्स के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया शुरू की तो प्रीतम ने इसका फ ायदा उठाकर युवाओं को नौकरी लगवाने का लालच देना शुरू कर दिया। इसमें प्रीतम ड़हरवाल के द्वारा युवाओं को नौकरी का सपना दिखाकर उनसे लाखों रुपए की मांग की जाती रही जिसे युवाओं के द्वारा दिया गया। परंतु ठगी प्रतीत होते ही रुपए की मांग भी तेज हो गई और शिकायत का दौर भी प्रारंभ रहा।
राजनीतिक पकड़ बताकर ऐंठे लाखों रुपए
आरोपी ने खुद की शासन और राजनीति में गहरी पकड़ होने का दावा करते हुए वारासिवनी, बालाघाट और लांजी क्षेत्र के कई युवाओं को अपने जाल में फ ंसाया। कटंझरी निवासी पियूष राउत ने नौकरी की उम्मीद में आरोपी को करीब ३ लाख रुपए दिए थे। इसी तरह अन्य कई युवाओं से भी लाखों रुपए वसूले गए। जब लंबे समय तक ना तो नौकरी लगी और ना ही पैसे वापस मिले तो पीडि़तों ने ठगी का अहसास होने पर पुलिस अधीक्षक और स्थानीय थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपी।
पुलिस की कार्यवाही और गिरफ्तारी
पीडि़तों की शिकायत पर गंभीरता दिखाते हुए वारासिवनी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक १८१/२६ दर्ज किया है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा ३१८,४ और ३,५ के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए १ मई की शाम करीब ५.३० बजे आरोपी प्रीतम डहरवाल को नगर से गिरफ्तार कर लिया।
६ दिन की पुलिस रिमांड मंजूर
प्रीतम डहरवाल को २ मई को वारासिवनी न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। मामले की गंभीरता और ठगी गई राशि की बरामदगी सहित अन्य पीडि़तों की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने न्यायालय से रिमांड की मांग की थी। न्यायालय ने आरोपी को ६ दिन की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। रिमांड के दौरान प्रीतम डहरवाल से गहन पूछताछ की जाएगी। पुलिस को अंदेशा है कि ठगी का शिकार हुए युवाओं की संख्या और बढ़ सकती है तथा इस मामले में कुछ और महत्वपूर्ण सुराग हाथ लग सकते हैं।










































