बालाघाट : पति की दीर्घायु के लिए महिलाओ ने रखा निर्जला व्रत

0

बालाघाट (पद्मेश न्यूज)। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरितालिका तीज पर्व जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म की महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला यह प्रमुख पर्व है सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु अखंड सौभाग्य और परिवार के सुख समृद्धि के लिए निर्जला व्रत धारण कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करती है, वही कुंवारी कन्याओं द्वारा भी मनोवांछित वर की कामना के साथ इस व्रत को धारण किया जाता है।
महिलाओं ने किया सोलह श्रंगार

इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं व्रत के संकल्प के साथ सुबह 5 बजे स्नान कर नए कपड़े पहन कर सोलह सिंगार करती है व्रत धारण कर पूजा की जगह पर चौक पूरा कर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा में चढ़ाने वाली समस्त सामग्री चढ़ाकर पूजा अर्चना करती है। यह निर्जला व्रत 24 घंटे का रहता है। यह व्रत सुबह 5 बजे पूजा अर्चना करने के साथ प्रारंभ हो गया है, रात में महिलाओं द्वारा जागरण कर भजन कीर्तन इत्यादि कार्यक्रम किए जाते हैं वही दुसरे दिन सुबह विसर्जन के साथ इस निर्जला व्रत का समापन होता है।
वर्ष भर के उत्सवो में महिलाओं का सबसे बेस्ट उत्सव यह होता है
व्रतधारी महिला श्रीमती सुनीता ब्रम्हे ने बताया कि कहां जाता है माता पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए इस व्रत को किया था, तो महिलाओं में भी यह भावना आई कि क्यों न हम भी अपने पति के दीर्घायु और अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए इस व्रत को करें। जंगल के जितने फल फूल होते है साथ ही बेलपत्र आदि सामग्री से पूजा होती है। सुबह 5 बजे उठकर मौन व्रत में रहते हैं स्नान करने के बाद ही एक दूसरे से बात करते हैं। रामदतुन से दतुन की जाती है यह पूरा व्रत निर्जला व्रत रहता है रात भर भजन-कीर्तन करते हैं महिलाएं एक-दूसरे के घर जाकर भजन कीर्तन करती है। वर्ष भर के उत्सवो में महिलाओं द्वारा इस उत्सव को सबसे बेस्ट उत्सव माना जाता है।
पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखते हैं


वार्ड नंबर 30 निवासी श्रीमती गौरी लिल्हारे ने बताया कि उनके द्वारा हर वर्ष इस व्रत को बड़े ही उत्साह के साथ रखा जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है हरितालिका तीज व्रत में सुबह से ही पूजा की जाती है और गौर निकाला जाता है, 24 घंटे निर्जला व्रत रहने के कारण यह काफी कठिन व्रत होता है।
अब घरों में ही विसर्जन किया जाता है
वार्ड नंबर 30 निवासी श्रीमती विनीता बुर्डे ने बताया कि इस व्रत में महिलाएं निर्जला व्रत रहती है। इस व्रत में शंकर जी को चढऩे वाला बेलपत्र इत्यादि से पूजा होती है, व्रतधारी महिलाओं द्वारा रात जागरण किया जाता है भजन कीर्तन आदि कार्यक्रम किए जाते हैं। व्रत होने के पश्चात गौर विसर्जन किया जाता है यह विसर्जन पहले नदियों में होता था लेकिन अब घरों में ही विसर्जन होता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here