नई दिल्ली: मोहम्मद यूनुस के डेढ़ सालों के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश के संबंध काफी खराब रहे। लेकिन तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद ढाका और नई दिल्ली के बीच संबंध काफी सुधरे हैं। ढाका ने 30 अप्रैल को भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब करके कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया। यह कदम असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उन विवादित टिप्पणियों के बाद उठाया गया जिनके बारे में बांग्लादेश का कहना है कि वे द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर करती हैं। बांग्लादेश विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि भारतीय राजदूत से बांग्लादेश विदेश विभाग की महानिदेशक (दक्षिण एशिया) इशरत जहां ने सरमा की टिप्पणी को लेकर बांग्लादेश की नाराजगी से उन्हें अवगत कराया।
बांग्लादेशी पत्रकार फैसल महमूद ने एशिया टाइम्स में लिखा है कि खबरों के मुताबिक CM सरमा ने कहा था कि वह “प्रार्थना” करते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध बेहतर न हों। उन्होंने तर्क दिया कि दोनों देशों के बीच संबंध और खराब होते रहने चाहिए। किसी पड़ोसी देश के किसी वरिष्ठ निर्वाचित अधिकारी का इतनी खुले तौर पर कूटनीतिक संबंधों में गिरावट की इच्छा जाहिर करना एक दुर्लभ बात है। इसीलिए बांग्लादेश की नाराजगी का मतलब है कि पहले से ही दोनों देशों के नाजुक संबंध को और कमजोर करना।










































