‘मिर्जापुर: द मूवी’ के कई गानों में से एक पर सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है, वह दशकों पहले का है। उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की आवाज में अमर हुआ गाना ‘सांसों की माला पे’ फिल्म के मिड-क्रेडिट सीक्वेंस में आता है। इसने सुनने वालों को उस गाने की याद दिला दी है, जिसे कव्वाली की महफ़िलों, हिंदी सिनेमा, स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया पर बार-बार नई जिंदगी मिली है।
फिल्म के नौ-ट्रैक वाले एल्बम में जो वर्जन है, उसमें नुसरत की आवाज के साथ मधुर शर्मा और वैभव पानी का मॉडर्न म्यूजिक मिक्स किया गया है। 31 अगस्त को रिलीज हुआ यह गाना उस सीन में बजता है जिसमें बीना त्रिपाठी और उनके पुराने प्रेमी का जिक्र होता है। इसमें एक दिलचस्प और डार्क आयरनी (विडंबना) है। जब बीना कहती हैं, ‘प्यार ही तो है, जिंदगी भर थोड़ी ही रहता है,’ तो बैकग्राउंड में एक ऐसा गाना बजता है जो हमेशा रहने वाले प्रेमी की याद में बनाया गया है।





































