बालाघाट।जिले में रोजगार की कमी के चलते अक्सर ग्रामीण अंचल के लोग कमाने खाने के लिए महानगरों में पलायन करने के लिए मजबूर है।इसी बीच मलाजखंड थाना क्षेत्र के ग्राम पण्ड्रापानी से रोजगार की तलाश में कर्नाटक गए एक युवक के रहस्यमयी तरीके से लापता होने का एक मामला सामने आया है।जिसमे विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय से जुड़े एक परिवार ने ठेकेदार और उसके साथी पर, उनके पुत्र का अपहरण किए जाने का आरोप लगाया है।जहां उनके पुत्र का पुना रेलवे स्टेशन से अपहरण किए जाने की बात कहते हुए पीड़ित परिवार ने मामले को लेकर कलेक्टर कार्यालय में एक ज्ञापन सौपा है। मामले में परिजनों ने एक व्यक्ति पर युवक को अपने कब्जे में रखने, उसका मोबाइल, पैसा और सामान छीन लेने तथा लगातार गुमराह करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार ने कलेक्टर बालाघाट को आवेदन सौंपकर युवक को सकुशल मुक्त कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई है।
सितंबर 2025 में कर्नाटक गया था दशरू धुर्वे
ग्राम पण्ड्रापानी, थाना मलांजखण्ड, तहसील बिरसा निवासी सुखदेव सिंह धुर्वे ने कलेक्ट्रेट में दिए आवेदन में बताया कि वह विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय से संबंध रखते हैं। उनका बड़ा पुत्र दशरू धुर्वे एवं दूसरा पुत्र निलेश धुर्वे गांव में रोजगार नहीं मिलने के कारण सितंबर 2025 में गांव के अन्य युवकों गणेश धुर्वे एवं नेमसिंह परते के साथ मजदूरी करने कर्नाटक चले गए थे। वहां वे गुलबर्गा (कलबुर्गी) क्षेत्र में ठेकेदार सुरेश राठौर के पास मजदूरी कार्य कर रहे थे।परिजनों के अनुसार प्रारंभ में दोनों युवक नियमित रूप से परिवार से संपर्क में रहते थे और समय-समय पर घर पैसे भी भेजते थे। लेकिन कुछ समय बाद मजदूरी भुगतान को लेकर विवाद की स्थिति बनने लगी। इसी दौरान दशरू धुर्वे घर वापस लौटने के लिए निकला। आरोप है कि वह बिलासपुर निवासी सूरज लोधी पिता चूरन लोधी के साथ 26 अप्रैल 2026 को गुलबर्गा से निकला था।जो पुना आने के बाद अचानक से लापता हो गया।
पिता को फोन कर सुनाई थी दास्तान
परिजनों द्वारा बताया गया कि दशरू ने अपने पिता को फोन पर बताया था कि सूरज लोधी ने उसका मोबाइल, पैसा और पूरा सामान अपने कब्जे में ले लिया है। उसके पास गांव लौटने के लिए किराये तक के पैसे नहीं हैं और वह पूना रेलवे स्टेशन पर फंसा हुआ है। इसके बाद परिवार ने गांव के ही अनिल धुर्वे और गोलु मरकाम को करीब 7 हजार रुपये देकर पूना भेजा, ताकि दशरू को वापस लाया जा सके।परिजनों का आरोप है कि सूरज लोधी लगातार अलग-अलग बातें कर उन्हें गुमराह करता रहा। कभी वह कहता कि दशरू उसके पास है, तो कभी कहता कि वह सुपरवाइजर के पास है। इतना ही नहीं, कभी पैसे देकर युवक को ले जाने की बात कहता रहा। लेकिन जब परिवार के लोग पूना पहुंचे तो उन्हें दशरू से ना तो मिलने दिया गया और ना ही बात कराई गई।वही सूरज ने उनके पुत्र को कही और ले जा लिया, जिसका आजतक पता नही चल पाया है।वही 28 अप्रैल के बाद से ही उनके पुत्र का उनसे संपर्क टूट चुका है।
पुत्र को सह-कुशल वापस लाया जाए- बुधियारिन धुर्वे
दशरू की माँ बुधियारिन धुर्वे ने बताया कि 28 अप्रैल 2026 की शाम लगभग साढ़े चार बजे दशरू से अंतिम बार मोबाइल नंबर 9921981816 से बातचीत हुई थी। इसके बाद से युवक का कोई पता नहीं चल पाया है। अब संबंधित व्यक्ति फोन भी रिसीव नहीं कर रहा है, जिससे परिवार को किसी बड़ी अनहोनी की आशंका सताने लगी है।हमारी मांग है प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करे, और पुत्र को सह कुशल वापस लाया जाए।
मामले की यथाशीघ्र की जाए कार्यवाही-भुवन
वही ज्ञापन को लेकर की गई चर्चा के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता एंव अधिवक्ता हेमलाल धुर्वे,और गोंडवाना महासभा राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष भुवन सिंह कोर्राम ने सँयुक्त रूप से बताया कि मामले को लेकर बैगा समाज एवं ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल है। प्रशासन से मांग की है कि युवक की तत्काल तलाश कर उसे सकुशल परिवार तक पहुंचाया जाए तथा यदि मामला मानव तस्करी, बंधक बनाने या अपहरण से जुड़ा हो तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।इस मामले में कलेक्टर ने हस्तक्षेप कर पुलिस एवं संबंधित राज्यों के प्रशासन से समन्वय स्थापित करते हुए युवक की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित करानी चाहिए।










































