बिल्डर ने फ्लैट देने में की देरी? EMI से GST तक, इन खर्चों से हो सकता है नुकसान

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Delayed Flat Possession: अक्सर लोग अपना खुद का घर खरीदने के लिए होम लोन लेते हैं। लेकिन क्या हो अगर बिल्डर तय समय पर फ्लैट का पजेशन नहीं दे?Delayed Flat Possession: अपना घर खरीदने के लिए अक्सर लोग जीवनभर की बचत लगा देते हैं और होम लोन (Home Loan) भी लेते हैं। लेकिन अगर बिल्डर तय समय पर फ्लैट का पजेशन नहीं देता, तो खरीदार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। एक तरफ घर का इंतजार बढ़ता है, वहीं दूसरी तरफ होम लोन की EMI, किराया और अन्य खर्च जारी रहते हैं। इतना ही नहीं, फ्लैट का सौदा रद्द करने पर भी पूरी रकम वापस मिले यह जरूरी नहीं-

फ्लैट नहीं मिला, फिर भी भरनी पड़ सकती है EMI

आपको यह समझने की जरूरत है कि अगर आपने फ्लैट खरीदने के लिए होम लोन लिया है तो बिल्डर की देरी से बैंक के प्रति आपकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। बैंक और खरीदार के बीच लोन का समझौता अलग होता है। इसलिए बिल्डर के पजेशन में देरी करने पर भी EMI चुकानी पड़ सकती है। अगर आप बिना उचित समाधान के किस्तें रोक देते हैं, तो आपका क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है और बैंक वसूली की कार्रवाई भी कर सकता है।

GST और रजिस्ट्रेशन शुल्क की वापसी आसान नहीं

फ्लैट खरीदते समय खरीदार को GST, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन जैसे खर्च भी उठाने पड़ सकते हैं। ये रकम संबंधित सरकारी विभागों को दी जाती हैं। ऐसे में बिल्डर से पैसा वापस मिलने पर इन सभी खर्चों की वापसी अपने आप नहीं होती। इनके लिए अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है। वहीं, बिक्री समझौते में दर्ज शर्तों के आधार पर बिल्डर प्रशासनिक या कैंसलेशन चार्ज भी काट सकता है।प्रोसेसिंग फीस और इंश्योरेंस का खर्च

होम लोन लेते समय बैंक प्रोसेसिंग फीस, कानूनी जांच और अन्य सेवाओं के लिए शुल्क ले सकता है। इसके अलावा, खरीदार ने अगर बीमा कराया है, तो उसका प्रीमियम भी खर्च में जुड़ सकता है। फ्लैट का सौदा रद्द होने पर ये रकम अपने आप वापस नहीं मिलती। खरीदार को इन खर्चों के लिए अलग से मुआवजा मांगना पड़ सकता है।

RERA के तहत क्या हैं अधिकार?

RERA की धारा 18 के तहत, फ्लैट का पजेशन समय पर नहीं मिलने पर खरीदार बिल्डर से निर्धारित दर पर ब्याज के साथ रिफंड और मुआवजे की मांग कर सकता है। यह वैधानिक ब्याज बैंक को चुकाए गए प्री-ईएमआई ब्याज के नुकसान की भरपाई करने में मदद कर सकता है, लेकिन खरीदार को मुकदमे के दौरान लोन से जुड़े अन्य खर्चों के लिए भी स्पष्ट रूप से मुआवजे की मांग करनी होगी। इसमें लोन प्रोसेसिंग फीस और बीमा प्रीमियम जैसे खर्च शामिल हो सकते हैं। अगर RERA अथॉरिटी या उपभोक्ता अदालत बिल्डर को इन वित्तीय नुकसानों की भरपाई करने का स्पष्ट आदेश नहीं देती है, तो खरीदार को इन खर्चों का नुकसान खुद ही उठाना पड़ सकता है।

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