261 रुपए महंगा होकर 885 रुपए का हुआ 5kg वाला सिलेंडर, रसोई गैस से बस 31 रुपए रह गया सस्ता

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मई महीने की शुरुआत के साथ ही आम आदमी और मिडिल क्लास लोगों के लिए महंगाई के मोर्चे पर एक और बुरी खबर आई है। तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के साथ-साथ 5 किलोग्राम (5 Kg LPG Cylinder) वाले छोटे एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भी भारी इजाफा कर दिया है। यह छोटा सिलेंडर अब 261 रुपए महंगा हो गया है, जिसके बाद इसकी नई कीमत 885 रुपए तक पहुंच गई है। इस अचानक हुई बढ़ोतरी ने उन लोगों के बजट को हिला कर रख दिया है जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए छोटे सिलेंडर पर निर्भर रहते हैं। यही नहीं सबसे बड़ा झटका तो ये है कि 5kg वाला LPG Cylinder 14kg वाले सिलेंडर से महज 31 रुपए ही सस्ता है।

रसोई गैस और छोटे सिलेंडर की कीमतों में अंतर

इस बढ़ोतरी के बाद एक बहुत ही चौंकाने वाली स्थिति पैदा हो गई है। अब 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडर और घर में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में महज 31 रुपए का अंतर रह गया है। जहां घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 916 रुपए के आसपास है, वहीं मात्र 5 किलो गैस वाला यह छोटा सिलेंडर अब 885 रुपए का मिल रहा है। यह अंतर इतना कम है कि अब उपभोक्ता यह सोचने पर मजबूर हैं कि कम गैस के लिए इतनी भारी कीमत चुकाना कितना तर्कसंगत है।

मजदूरों और छात्रों पर सबसे ज्यादा असर

कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का सबसे सीधा और गहरा असर समाज के निचले तबके, खासतौर पर दिहाड़ी मजदूरों और शहरों में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों पर पड़ेगा। ये लोग अक्सर अपनी कम आय या सीमित बजट के कारण बड़ा सिलेंडर नहीं ले पाते और छोटे सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। 261 रुपए की यह एकमुश्त बढ़ोतरी उनके महीने भर के खर्च को पूरी तरह से बिगाड़ सकती है। साथ ही, रेहड़ी-पटरी लगाने वाले छोटे दुकानदार जो चाय या नाश्ता बेचने के लिए इन सिलेंडरों का इस्तेमाल करते हैं, उनकी लागत भी काफी बढ़ जाएगी।

क्या पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ेंगे?

गैस की कीमतों में लगी इस आग के बाद अब अटकलों का बाजार गर्म है कि क्या पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी जल्द ही बढ़ोतरी देखने को मिलेगी? अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और तेल कंपनियों को हो रहे लगातार नुकसान को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में भी संशोधन हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह आम आदमी के लिए ‘दोहरी मार’ जैसा होगा, क्योंकि ईंधन महंगा होने से परिवहन और माल ढुलाई महंगी हो जाती है, जिसका सीधा असर हर जरूरी वस्तु की कीमत पर पड़ता है।

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