पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जनपद पंचायत भवन सहित ग्राम पंचायत अधिकारी विहीन पड़ी हुई है। जहां पर जिम्मेदार अमला जिला पंचायत सीईओ की कार्यप्रणाली के खिलाफ हड़ताल पर चले जाने से दिक्कत की स्थिति निर्मित हो गई है। ग्रामीणजन जनपद पंचायत ग्राम पंचायत में अपनी जरूरी कार्यों से आना.जाना कर रहे हैं। परंतु उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ रहा है तो वहीं ग्राम पंचायत में सबसे बड़ी समस्या त्योहार के समय भुगतान की बनी हुई है। जहां अपने कार्यों के लिए लोग आ रहे हैं परंतु उन्हें खाली कुर्सी ही प्राप्त हो रही है। ऐसे में अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर परेशान है। जिनके द्वारा शासन प्रशासन से जल्द हड़ताल पर बैठे अधिकारियों की मांगों को पूर्ण कर व्यवस्था बनाए जाने की मांग की जा रही है।
होली त्यौहार मनाने पलायन कर चुके मजदूर होते हैं वापस
बालाघाट जिले में कोई बड़ी रोजगार व्यवस्था नही होने और प्रशासन के द्वारा कोई रोजगार सृजन ना किए जाने को लेकर बड़ी संख्या में पलायन की स्थिति बनी रहती है। जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के मजदूर महानगरों में जाकर अपना रोजगार करते हैं,परंतु वर्ष में होली और दिवाली दो बड़े त्योहार होते हैं जिसमें हर मजदूर अपने घर परिवार के लिए वापस आता है। इसी के तहत होली पर्व कल से चालू होना है जिसके लिए महानगरों में रोजगार की तलाश में गए मजदूर अब वापस हो रहे हैं। जो होली मनाने के साथ ही अपने ग्राम पंचायत के हितग्राही मूलक कार्य भी करवाते हैं, परंतु जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत का अमला अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा चुका है। जिससे उनके सामने अब दिक्कत पैदा हो गई है कि उन्हें अब हड़ताल खत्म होते तक का इंतजार करना पड़ेगा या आगे किसी और समय में आकर कार्य करवाना पड़ेगा। तो वहीं दूसरी बड़ी समस्या ग्राम के वह लोगों के सामने खड़ी है जिनका ग्राम पंचायत के माध्यम से भुगतान बकाया है। ऐसे में ग्रामीणों के द्वारा शासन प्रशासन से इस अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे अधिकारी कर्मचारियों की मांग को पूर्ण कर व्यवस्थाएं बनाने की मांग की जा रही है ताकि वह अपना स्थानीय कार्य एवं होली पर्व कुशलतापूर्वक मना सके।
अधिकारियों की तानाशाही से ग्रामीणजन परेशान है – सुनील राणा
सरपंच प्रतिनिधि सुनील राणा ने बताया कि जनपद एवं जिले के मनरेगा अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी सभी हड़ताल पर चल रहे हैं। यह जिला कार्यपालन अधिकारी के व्यवहार और जिस प्रकार वह प्रशासनिक अमले मनरेगा अधिकारियों पर दबाव बनाकर काम करवाते हैं। इसके अलावा बेसमय वीडियो कॉन्फ्रें सिंग एवं कहीं भी जाकर १० वर्ष पुराने कार्य की रिकवरी निकल रहे हैं। इससे जीआरएस ,सचिव ,सरपंच, उपयंत्री अधिकारी सरपंच सभी प्रताडि़त है। वह जिले में जरूरी नहीं स्वयं की मर्जी से काम देते हैं मनरेगा के २६९ कामों में कुछ भी नहीं मिल रहा है केवल छोटे खेत तालाब और मां की बगिया पर वह काम कर रहे हैं। उसमें मजदूर लगाने दबाव बना रहे हैं जबकि सरकार के द्वारा पंचायत को कोई काम नहीं दिया गया है बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है।
जिला सीईओ के बर्ताव के खिलाफ में जनपद सीईओ की हड़ताल से काम अवरूध्द हो रहा है – मोनू देशमुख
सरपंच प्रतिनिधि मोनू देशमुख ने बताया कि अभी होली का इतना बड़ा महत्वपूर्ण त्यौहार है। गांव में बाहर से मजदूर पर्व मनाने आ रहे हैं तो उन्हें दिक्कत है कि हड़ताल है। वहीं इसमें गांव के कुछ मजदूर है उनका भुगतान निकलना था तो उन्हें भी नही नुकसान हो रहा है। हर किसी को त्यौहार मनाने के लिए रुपये की जरूरत होती है। बाहर से मजदूर आए हैं उनके हितग्राही मूलक कार्य भी अटक गए हैं। जिला सीईओ के बर्ताव के खिलाफ जनपद सीईओ की हड़ताल है इस पर सरकार ने गंभीरता से ध्यान देकर समस्या का हल करना चाहिए। इसका असर ग्रामीणो तक पहुंच रहा है हमारे यहां ही पहले स्थानापन्न फिर उपचुनाव हुए २ महीने से पंचायत चालू हुई थी तो अब हड़ताल आ गई। अभी सामूहिक विवाह लालबर्रा में होना है तो वहां हमारे गांव के जोड़े जाएंगे तो सचिव जीआरएस पीसीओ बीपीओ सीईओ के हस्ताक्षर लगते हैं यह कोई नहीं है पंचायत के सभी जरूरी काम बंद है।










































