बीते 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले बालेन शाह की सरकार बने अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और उनके गृहमंत्री समेत दो मंत्रियों के इस्तीफे हो गए हैं। इसके अलावा, भंसार नियम को लेकर भारत के सीमाई क्षेत्र में भी उनका विरोध हो रहा है।
Gen Z आंदोलन के बाद जब नेपाल में आम चुनाव हुए और बालेन शाह की सरकार बहुमत के साथ सत्ता में आई तो लगा कि इस पहाड़ी देश के हालात बदलेंगे, लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता समाप्त होगी और देश भ्रष्टाचार से मुक्त होकर विकास के पथ पर अग्रसर होगा, लेकिन नेपाल की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बीते 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले बालेन शाह की सरकार बने अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और उनके गृहमंत्री समेत दो मंत्रियों के इस्तीफे हो गए हैं। इसके अलावा, भंसार नियम को लेकर भारत के सीमाई क्षेत्र में भी उनका विरोध हो रहा है।
सबसे पहले बात इस्तीफों की, किसने और क्यो?
नेपाल में चल रही वर्तमान राजनीतिक उठा-पटक को समझने से पहले बात उन इस्तीफों की कर लेते हैं, जिनके कारण यह विषय शुरू हुआ है। हाल ही में नेपाल के गृहमंत्री सुधन गुरुंग ने पद से इस्तीफा दे दिया। उन पर हितों के टकराव और संपत्ति विवरण में कथित गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप थे। इन आरोपों के कारण ही उन्होंने शपथ ग्रहण करने के मजह 26 दिनों में ही इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और जनविश्वास बनाए रखने के लिए नैतिकता के आधार पर उन्होंने यह निर्णय लिया है।








































