- Who is Running Iran: बेहद बिखरा हुआ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से जब ईरान के नेतृत्व के बारे में पूछा गया तो उन्होंने यही जवाब दिया था। उनका इशारा इस ओर था कि ईरान की लीडरशिप बिखरी हुई है और फैसला लेने वाला कोई एक नेता नहीं है। इससे सवाल उठता है कि ईरान चला कौन रहा है? इसका जवाब मुश्किल है और ट्रंप के दावे जैसा सीधा भी नहीं है। ऐसा लगता है कि बेहद घायल मोजतबा खामेनेई, जो अपने पिता अयातुल्लाह अली खामनेई (Ali Khamenei) की अमेरिका-इजराइल हमले में मौत के बाद देश के सर्वोच्च नेता बने, उन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) के एक समूह द्वारा सलाह दी जा रही है। दरअसल, दर न्यू यॉर्क टाइम्स (The New York Times) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोजतबा देश को ऐसे चला रहे हैं मानो वे किसी बोर्ड के डायरेक्टर हों। जैसे-जैसे ट्रंप ईरान के नेतृत्व को लेकर बयान देते जा रहे हैं, यह समझना जरूरी है कि वास्तव में देश को कौन चला रहा है और सुरक्षा, युद्ध और कूटनीति से जुड़े फैसले कौन ले रहा है।
- ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई कहां हैं?
- अमेरिका-इजराइल हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा को देश का सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया। हालांकि, नियुक्ति के बाद से न तो वे सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए हैं और न ही उनकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। वे लगातार नजरों से दूर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर अटकलें लग रही हैं। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, 56 वर्षीय मोजतबा गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज डॉक्टरों की एक टीम कर रही है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान (Masoud Pezeshkian) भी शामिल हैं, जो पेशे से हृदय सर्जन हैं।
- मोजतबा खामेनेई कितने स्वस्थ?
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई को कृत्रिम पैर (प्रोस्थेटिक लेग) की जरूरत है, जबकि एक ऑपरेशन के बाद उनका एक हाथ अभी भी पूरी तरह काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा, उनके चेहरे और होंठों पर गंभीर जलन से चोटें (बर्न इंजरी) आई हैं, जिसकी वजह से उन्हें बोलने में दिक्कत हो रही है और आगे चलकर उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ेगी। The New York Times ने चार वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि भले ही मोजतबा गंभीर रूप से घायल हैं, लेकिन मानसिक रूप से वे सतर्क और सक्रिय हैं।
- उनकी गंभीर चोटों और सुरक्षा कारणों से उनके पास पहुंच भी बेहद सीमित कर दी गई है। अधिकारियों और जनरलों को उनसे दूर रखा जा रहा है, क्योंकि ईरान को आशंका है कि इजराइल उनकी लोकेशन का पता लगाकर उन्हें भी निशाना बना सकता है। फिलहाल, मोजतबा खामेनेई से सभी संवाद हस्तलिखित पत्रों के जरिए हो रहा है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाए जाते हैं, यानी एक मानवीय श्रृंखला के जरिए। इसी तरह उनके संदेश आईआरजीसी जनरलों तक पहुंचते हैं।
- ईरान की कमान किसके हाथ में है?
- उनकी चोटों और उन्हें छिपाकर रखने की रणनीति के चलते, आईआरजीसी ने मोजतबा के चारों ओर एक मजबूत सुरक्षा घेरा बना लिया है। चैथम हाउस की मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका की निदेशक सनम वकिल ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, मोजतबा अभी पूरी तरह से कमान या नियंत्रण में नहीं हैं। शायद उनके प्रति सम्मान का भाव है। वे औपचारिक रूप से निर्णयों पर हस्ताक्षर करते हैं या निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। ईरान पर नजर रखने वाले कई लोग मानते हैं कि आईआरजीसी के जनरल प्रभावी रूप से देश के प्रभारी हैं और युद्ध एवं सुरक्षा मामलों पर निर्णय लेते हैं। जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, आईआरजीसी के कमांडर अहमद वाहिदी ईरान बेहद ताकतवर बन गए हैं। वाहिदी को मोहम्मद पाकपुर के स्थान पर नियुक्त किया गया था, जिनकी हत्या ऑपरेशन रोरिंग लायन और एपिक फ्यूरी की शुरुआत में कर दी गई थी।
- कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इराक युद्ध के दौरान आईआरजीसी में सेवा करने के कारण मोजतबा आईआरजीसी के प्रति सम्मानजनक रवैया रखते हैं। साथ ही, मोजतबा के पास अपने पिता जैसा दबदबा नहीं है। 56 वर्षीय इस व्यक्ति के पास अपने पिता के समान राजनीतिक कद नहीं है, न ही उनके पास धार्मिक प्रभाव है। यानी ईरान की असली सत्ता आईआरजीसी के हाथों में ही नजर आ रही है।
- आईआरजीसी का कितना दबदबा?
- ईरान में शासन व्यवस्था में आईआरजीसी का दबदबा कायम है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन समेत चुनी हुई सरकार को हाशिये पर धकेल दिया गया है और उसे आंतरिक स्थिरता बनाए रखने और भोजन और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है। ईरान विशेषज्ञ नाती तुवियन ने यरुशलम पोस्ट को बताया, राष्ट्रपति पेजेश्कियन का अधिकतम अधिकार कचरा उठाने वाले ट्रकों के रंग का निर्धारण करने तक सीमित है। राष्ट्रपति का कोई अधिकार नहीं है, बिलकुल न के बराबर।
- राजनयिक फैसला भी आईआरजीसी के जनरलों द्वारा निर्देशित किए जा रहे हैं। इसका सबसे स्पष्ट संकेत अमेरिकी वार्ता में विदेश मंत्री अब्बास अराघची की घटती भूमिका है। वास्तव में, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ, जिनके आईआरजीसी से घनिष्ठ संबंध हैं, उन्होंने वाशिंगटन के साथ विचार-विमर्श की कमान संभाल ली है। आईआरजीसी के नियंत्रण में होने के कारण, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वे वार्ता में अधिक कठोर रुख अपनाएंगे। दरअसल, ऐसी खबरें हैं कि आईआरजीसी के जनरलों ने ही डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी का हवाला देते हुए अमेरिका के साथ वार्ता के दूसरे दौर को करने से इनकार कर दिया था।








































