बरगद के पेड़ के नीचे लग रही पंचायत, जर्जर भवन बना खतरा,

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बैहर जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली एक ग्राम पंचायत माना इन दिनों भवन के अभाव में खुले आसमान के नीचे संचालित होने को मजबूर है। ग्राम पंचायत भवन अत्यधिक जर्जर होने के कारण पंचायत का नियमित कामकाज गांव में स्थित एक बरगद के पेड़ के नीचे किया जा रहा है। ग्राम की सरपंच ने बताया कि पंचायत भवन की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। भवन इतना जर्जर हो गया है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पंचायत प्रतिनिधियों ने पुराने भवन में बैठकर कार्य करने का जोखिम नहीं उठा रहे और गांव के बरगद के पेड़ के नीचे ही पंचायत की बैठकें एवं प्रशासनिक कार्य किए जा रहे हैं। सरपंच ने बताया कि ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं, प्रमाण पत्रों और पंचायत से जुड़े कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और गर्मी के मौसम में खुले स्थान पर पंचायत संचालन करना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में जल्द नए पंचायत भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। मामले को लेकर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि पंचायत भवनों की स्वीकृति वरिष्ठ स्तर से जारी की जाती है। जैसे ही नए भवन की स्वीकृति प्राप्त होगी, संबंधित ग्राम पंचायत को प्राथमिकता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

डिजिटल युग में जहां गांवों तक विकास पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं जिले की एक ग्राम पंचायत आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है। हालात ऐसे हैं कि यहां पंचायत भवन के जर्जर हो जाने के बाद पिछले कुछ वर्षों से ग्राम पंचायत की बैठकें बरगद के विशाल पेड़ के नीचे आयोजित की जा रही हैं। ग्रामीणों की समस्याएं सुनने से लेकर सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और ऑनलाइन कार्यों के निष्पादन तक सभी काम खुले आसमान के नीचे किए जा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से लगी ग्राम पंचायत माना की, जहां करीब 50 वर्ष पुराना पंचायत भवन अब पूरी तरह खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। भवन की छत और दीवारों से प्लास्टर गिरने की घटनाएं लगातार सामने आईं। पंचायत में काम से पहुंचे दो से तीन ग्रामीण प्लास्टर गिरने से घायल भी हो चुके हैं। इसके बाद किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए पंचायत भवन में कामकाज बंद कर दिया गया। भवन की अनुपलब्धता के कारण बारिश के मौसम में पंचायत का संचालन उप स्वास्थ्य केंद्र के एक कमरे में जैसे-तैसे किया जाता है। वहीं गर्मी और सर्दी के दिनों में पंचायत कर्मचारी टेबल-कुर्सियां बाहर निकालकर बरगद के पेड़ के नीचे पंचायत लगाते हैं। यहां सरपंच, उपसरपंच, पंच, सचिव और रोजगार सहायक बैठकर ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण करते हैं। स्थिति यह है कि पंचायत की आमसभाएं भी इसी पेड़ के नीचे आयोजित होती हैं। वृद्धा पेंशन से जुड़े कार्य, समग्र आईडी बनवाना, विभिन्न प्रमाण पत्र तैयार करना, प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित जियो टैगिंग और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाएं भी इसी स्थान पर पूरी की जाती हैं। ग्राम पंचायत माना जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित है, जिसके कारण यहां अधिकारियों का आना-जाना भी बेहद कम हो पाता है। इस पंचायत के अंतर्गत माना, लपटी, छिपीटोला, नरगुटोला, चिंगाटोला और भूरसाटोला गांव शामिल हैं। पंचायत में कुल 13 वार्ड हैं, जबकि 356 मकान मौजूद हैं। यहां की कुल आबादी 1675 है और मतदाताओं की संख्या लगभग 1450 बताई जाती है।

मजबूरी में पेड़ के नीचे लगानी पड़ रही पंचायत – भागवती उइके

ग्राम पंचायत माना की सरपंच भागवती उइके ने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान पंचायत भवन पूरी तरह जर्जर हो गया। भवन में कार्य कराने पहुंचे दो से तीन लोग प्लास्टर गिरने से घायल भी हुए, जिसके बाद मामले की शिकायत जनप्रतिनिधियों और बैहर जनपद पंचायत के सीईओ से की गई। उन्होंने बताया कि अधिकारियों द्वारा किसी अन्य भवन में पंचायत संचालित करने की सलाह दी गई थी, लेकिन गांव में कोई वैकल्पिक भवन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बारिश के दौरान उप स्वास्थ्य केंद्र के एक कमरे का उपयोग किया जाता है, जबकि सर्दी और गर्मी में बरगद के पेड़ के नीचे पंचायत लगाना मजबूरी बन गई है। सरपंच ने कहा कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने से लेकर पंचायत के अन्य जरूरी कार्य इसी पेड़ के नीचे किए जाते हैं। नए पंचायत भवन की स्वीकृति के लिए कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं।

भवन की स्वीकृति मिलते ही माना को प्राथमिकता होंगी – अभिषेक

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ ने बताया कि ग्राम पंचायत भवनों की स्वीकृति भोपाल स्तर से होती है। जैसे ही नए भवनों की स्वीकृति प्राप्त होगी, ग्राम पंचायत माना को प्राथमिकता देते हुए नया भवन निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत चाहे तो वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किराए के भवन में भी अपने कार्यों का संचालन कर सकती है।

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