सिंगापुर पहुंचा भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS सुनयना, मलक्का स्‍ट्रेट के नाम से डरता है चीन, जानें ड्रैगन पर नकेल का प्‍लान

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सिंगापुर/नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर ईरान ने पूरी दुनिया में तेल और गैस की काफी हद तक सप्लाई रोक दी है। होर्मुज संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। लेकिन भारत के पास होर्मुज से भी ज्यादा संवेदनशील स्ट्रेट की चाबी है और वो है मलक्का स्ट्रेट। मलक्का स्ट्रेट को चीन का सबसे कमजोर नस कहा जाता है और युद्ध की स्थिति में भारत मलक्का स्ट्रेट को बंद करके चीन की एनर्जी सप्लाई लाइन को काट सकता है। चीन मलक्का संकट से सबसे ज्यादा डरता है और भारत मलक्का में अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए लगातार तैयारियां कर रहा है।

भारतीय नौसेना का इंडियन ओशन शिप (IOS) SAGAR अभियान के तहत INS Sunayna चांगी नौसैनिक अड्डे पर पहुंच गया है। ये भारतीय नौसेना की चल रही IOS SAGAR तैनाती के दौरान यह चौथा पोर्ट कॉल है। देखने में ये एक सामान्य अभ्यास लग सकता है लेकिन इसके रणनीतिक मायने काफी ज्यादा हैं और चीन से बेहतर इस बात को कोई और नहीं जान सकता। हालिया समय में किसी भी विवाद में समुद्री मार्ग को बाधित करने का एक ट्रेंड चल रहा है और भारत सहित कई देशों ने इसके खिलाफ तैयारियां की हैं।

मलक्का स्ट्रेट में भारत की बढ़ती शक्ति से क्यों डरता है चीन?

मलक्का जलडमरूमध्य, हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच सबसे छोटा रास्ता है। इस समुद्री व्यापार मार्ग का इस्तेमाल पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया (खास तौर पर चीन) में बने सामान को यूरोप और पश्चिम एशिया तक पहुंचाने के लिए एक रास्ते के तौर पर बड़े पैमाने पर किया जाता है। वहीं कच्चा तेल और गैस दूसरी दिशा में पश्चिम एशिया से चीन की ओर इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। चीन की ऊर्जा जरूरतों का लगभग 75–80% हिस्सा अब इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।

चीन लंबे समय से मलक्का जलडमरूमध्य को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चिंता मानता रहा है। चीन ने मलक्का जलडमरूमध्य से बचने के लिए दक्षिण में स्थित लोम्बोक और सुंडा जलडमरूमध्य का इस्तेमाल करने की कोशिश की है लेकिन इन वैकल्पिक रास्तों से यात्रा की दूरी 1800 और 3000 किलोमीटर ज्यादा बढ़ जाती है। इससे चीन में कच्चे तेल के आयात की लागत और समय दोनों में ही बढ़ोतरी होती है।

समंदर में शक्ति कैसे बढ़ा रही भारतीय नौसेना?

भारत की अर्थव्यवस्था जैसे जैसे मजबूत हो रही है वह अपने बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहा है। इसका मकसद आर्थिक और सैन्य दोनों ही क्षेत्रों में भारत के प्रभाव को बढ़ाना है। भारत सरकार ‘सागरमाला’ पहल के तहत 845 समुद्री परियोजनाओं में 6.06 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इनमें से 1.57 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक ‘ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना’ है। अंडमान और निकोबार केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा जारी एक प्रकाशन के मुताबिक इस पहल पर 1 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी।

मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त जलमार्ग है। निकोबार द्वीपसमूह के दोनों ओर दो प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग स्थित हैं: 10-डिग्री चैनल इस द्वीप समूह को उत्तर में अंडमान से अलग करता है और 80 किमी चौड़ा सिक्स-डिग्री चैनल इसे दक्षिण में इंडोनेशिया के सुमात्रा से अलग करता है। भारत सरकार इस द्वीप पर एक इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT), एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एक टाउनशिप बनाने की योजना बना रही है। एक ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बड़े मालवाहक जहाजों से कंटेनर लेता है उन्हें स्टोर करता है और आगे की ढुलाई के लिए उन्हें दूसरे जहाजों में ट्रांसफर करता है। इससे कोलंबो, दुबई और सिंगापुर जैसे विदेशी ICTT पर निर्भरता कम होगी और उम्मीद है कि इससे देश के हर साल लाखों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचेगी।

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