किसान कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष मुनेंद्र ठाकरे ने दिया इस्तीफा, विधायक पर लगाए गंभीर आरोप,

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लालबर्रा किसान कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष मुनेंद्र ठाकरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपनी 44 सदस्यीय कार्यकारिणी के साथ सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंपते हुए कांग्रेस संगठन में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि उनका कहना है कि फिलहाल उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। इस्तीफे के बाद मुनेंद्र ठाकरे ने बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पार्टी के अंदर और बाहर लगातार साजिश की जा रही थी, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने अपने इस्तीफा पत्र में भी विधायक और उनके समर्थकों के कारण मानसिक रूप से परेशान होने का उल्लेख किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने इस्तीफे से संबंधित पत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर भी साझा कर दिया, जिसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। मीडिया से चर्चा के दौरान मुनेंद्र ठाकरे ने कहा कि वे विधायक समर्थकों और कार्यकर्ताओं के व्यवहार से काफी समय से परेशान थे। संगठन के भीतर लगातार चल रही खींचतान और दबाव के चलते उन्होंने अपने साथ पूरी कार्यकारिणी के साथ इस्तीफा देने का निर्णय लिया। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस संगठन में अंदरूनी मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। वहीं राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि पार्टी संगठन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और इस्तीफे पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे की राजनीतिक मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। बीते कुछ दिनों से विधायक से जुड़े कई विवाद सामने आ चुके हैं, जिनमें उनके निजी सहायकों पर लगे अनियमितता के आरोप, संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी और पार्टी पदाधिकारियों के साथ टकराव जैसे मामले प्रमुख रहे हैं। हाल ही में लालबर्रा किसान कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष मुनेंद्र ठाकरे से जुड़ा एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसमें कथित रूप से गाली-गलौज और विवाद की बातें सामने आई थीं। इसके अलावा विधायक प्रतिनिधि को जिला पंचायत की बैठकों से हटाए जाने का मामला भी चर्चाओं में रहा। इन लगातार बढ़ते विवादों के बीच 6 मई को स्थानीय सर्किट हाउस में कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में पार्टी संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखने, आपसी मतभेद खत्म करने और संगठन को मजबूत करने को लेकर चर्चा की गई थी। हालांकि सूत्रों की मानें तो बैठक के दौरान कई मुद्दों पर तीखी बहस और नोकझोंक भी हुई थी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने संगठन में बढ़ रही गुटबाजी पर चिंता जताई थी। लेकिन बैठक के अगले ही दिन यानी 7 मई को राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। किसान कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष मुनेंद्र ठाकरे ने सुबह करीब 11 से 12 बजे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से अपने पद से इस्तीफा देने की जानकारी सार्वजनिक कर दी। उन्होंने अपनी पूरी कार्यकारिणी के साथ सामूहिक इस्तीफा देने की घोषणा की, जिसके बाद कांग्रेस संगठन में हलचल तेज हो गई। दूरभाष पर चर्चा करते हुए मुनेंद्र ठाकरे ने कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब से उन्हें किसान कांग्रेस का ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया था, तभी से विधायक अनुभा मुंजारे उनसे नाराज चल रही थीं। श्री ठाकरे के अनुसार लालबर्रा में आयोजित किसान सम्मेलन कार्यक्रम के बाद से मतभेद और अधिक बढ़ गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक के निजी सहायकों द्वारा उनके साथ गाली-गलौज की गई, मारपीट की धमकी दी गई और लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। मुनेंद्र ठाकरे ने कहा कि संगठन में लगातार अपमानित महसूस करने और सही ढंग से कार्य नहीं कर पाने की स्थिति के चलते उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने प्रदेश किसान कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान को संबोधित पत्र में अपनी 44 सदस्यीय कार्यकारिणी के साथ इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं और एक कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए आगे भी काम करते रहेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस संगठन में एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। खास बात यह है कि एक दिन पहले ही जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय उइके ने संगठन में अनुशासन बनाए रखने और मीडिया में बयानबाजी से बचने की नसीहत दी थी, लेकिन अगले ही दिन सामूहिक इस्तीफे का मामला सामने आने से पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल विधायक अनुभा मुंजारे की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस संगठन में लगातार बढ़ रही गुटबाजी और आपसी टकराव आने वाले चुनावों में पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। अब देखना होगा कि जिला कांग्रेस नेतृत्व इन हालातों पर किस प्रकार नियंत्रण करता है और संगठन को एकजुट रखने में कितना सफल हो पाता है।

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