मानेगांव में लावारिस हालत में घूमते मिला
सोशल मीडिया और पुलिस नेटवर्क से हुई पहचान
बालाघाट। थाना भरवेली पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए करीब एक साल से लापता मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति की पहचान कर उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। उत्तर प्रदेश के कायमगंज, फर्रुखाबाद निवासी व्यक्ति को भरवेली थाना क्षेत्र के ग्राम मानेगांव में लावारिस हालत में घूमते हुए पाया गया था। पुलिस की सक्रियता से करीब एक वर्ष बाद वह अपने परिवार से मिल सका।
भरवेली पुलिस के अनुसार 23 सितंबर 2026 को थाना भरवेली की एफआरवी डायल-112 पर सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम मानेगांव में एक अजनबी व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य के घूम रहा है और संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। सूचना मिलते ही एफआरवी में तैनात आरक्षक जगदीश बघेले तत्काल मौके पर पहुंचे और उक्त व्यक्ति को सुरक्षा की दृष्टि से थाना भरवेली लेकर आए।थाने में पुलिस द्वारा व्यक्ति से पूछताछ की गई लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह अपने संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था। पुलिस ने उसकी पहचान के लिए सोशल मीडिया एवं विभिन्न थानों के पुलिस नेटवर्क से संपर्क कर जानकारी जुटाने का प्रयास किया। लगातार प्रयासों के बाद उसकी पहचान कायमगंज फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश निवासी अभिनित पिता हरिश्चंद्र राठौर के रूप में हुई।पहचान सामने आने के बाद भरवेली पुलिस ने उसके गृह क्षेत्र से परिजनों की जानकारी प्राप्त की और तत्काल उनके संपर्क किया। परिजनों ने पुलिस को बताया कि अभिनित राठौर की मानसिक स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं है और वह करीब एक वर्ष पहले अपने घर से लापता हो गया था। लंबे समय से परिजन उसकी तलाश कर रहे थे।पुलिस से अभिनित राठौर के भरवेली में मिलने की सूचना प्राप्त होते ही उसके भाई प्रदीप एवं जीजा मनोज कुमार उत्तर प्रदेश से बालाघाट के लिए रवाना हुए और भरवेली थाना पहुंचे। थाना पहुंचने पर दोनों ने अभिनित राठौर को पहचान लिया।इसके बाद भरवेली पुलिस द्वारा आवश्यक जांच एवं तस्दीक की कार्रवाई पूरी करने के उपरांत अभिनित राठौर को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। करीब एक वर्ष बाद अपने परिवार के सदस्य को सकुशल पाकर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने भरवेली पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल एक लापता व्यक्ति को उसके परिवार से मिलाया गया बल्कि पुलिस की मानवीय भूमिका भी सामने आई। डायल-112 पर मिली सूचना पर तत्काल कार्रवाई पहचान के लिए सोशल मीडिया एवं पुलिस नेटवर्क का उपयोग और परिजनों तक पहुंच बनाने के प्रयास के चलते करीब एक साल से बिछड़ा परिवार अपने सदस्य से दोबारा मिल सका।










































