जज साहब ने पूछा- किसके साथ रहना है? 5 साल के बेटे ने कहा- मम्मी के साथ; जिद के आगे झुका एमपी हाईकोर्ट, मां को ही दी कस्टडी

0

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक बाल कस्टडी विवाद के दौरान उस वक्त दिलचस्प स्थिति बन गई, जब कोर्ट ने पांच साल के मासूम बच्चे से पूछा कि वह किसके साथ रहना चाहता है। बच्चे ने बिना झिझक के बेंच को बताया कि वह अपनी मां के साथ रहना चाहता है। बच्चे की इस इच्छा और उसकी देखभाल की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने मां को दी गई अंतरिम कस्टडी को स्थायी कर दिया है।

क्या था पूरा मामला?

जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ बच्चे की मां द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान बच्चे के पिता, दादी और मां, बच्चे के साथ कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट ने पाया कि दोनों पक्ष समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं और मजदूरी करते हैं। पिता ने अदालत को बताया कि वह एक मजदूर है और महीने के करीब 10,000 रुपये कमाता है। साथ ही उसने पत्नी पर कुछ आरोप भी लगाए और यह स्वीकार किया कि वह कभी-कभार शराब का सेवन करता है।यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक जोड़ा अपने बच्चों की जिंदगी की कीमत पर आपस में लड़ रहा है। अदालत के सवाल पर बच्चे ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसकी मां उससे प्यार करती है और वह उसी के साथ रहना चाहता है। बच्चा पिता की तुलना में मां की देखरेख में ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बेंच

दादी और नाना का रुख

सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने बच्चे की दादी से पूछा कि क्या वह पिता की गैर-मौजूदगी में बच्चे की देखभाल करने के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि यह उनके बेटे की जिम्मेदारी है। वहीं, मां के पिता (नाना) ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी बेटी अपने ससुराल लौट जाए, क्योंकि उनके पास देखने के लिए अन्य बच्चे भी हैं।बच्चे का कल्याण सबसे सर्वोपरि

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस स्थापित सिद्धांत को दोहराया कि कस्टडी के मामलों में बच्चे का कल्याण और भलाई ही सबसे महत्वपूर्ण विचार होता है। अदालत ने कहा कि कस्टडी केवल माता-पिता या अभिभावक के कानूनी अधिकार के आधार पर तय नहीं की जा सकती, बल्कि बच्चे की सामान्य भलाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और उसके भावनात्मक संबंधों को भी देखा जाना चाहिए।

अदालत ने पहले 21 सितंबर को बच्चे की कस्टडी अस्थायी रूप से मां को सौंपी थी और पक्षों को सुनने के बाद 22 सितंबर को इस अंतरिम आदेश को स्थायी कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस अधिकारियों द्वारा मां को सौंपी गई बच्चे की कस्टडी अब उसी के पास सुरक्षित रहेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here