पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। नगर मुख्यालय में माँसरस्वती महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और गहरी आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रध्दालुजन पहुंच रहे हैं। इस महोत्सव के तहत शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय लालबर्रा के सामने स्थित सामुदायिक भवन परिसर में गत दिवस प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र लालबर्रा द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर जीवंत चैतन्य झांकियों का शुभारंभ किया गया। सेवा केंद्र की बहनों द्वारा प्रतिदिन रात ८ बजे के बाद माँ दुर्गा, माँ महालक्ष्मी, माँ सरस्वती, गंगा मैया और अन्य देवियों के स्वरूप में जीवंत चैतन्य झांकियों का प्रदर्शन किया जा रहा है, जो दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
पलक झपकाएं बिना दर्शन दे रहीं देवियाँ
प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र लालबर्रा की इन जीवंत चैतन्य झांकियों को देखकर क्षेत्रीयजन आश्चर्यचकित हैं। झांकी में बैठी बहनें देवियों के दिव्य स्वरूप में नजर आती हैं और प्रदर्शन के दौरान उनकी आँखें व पलकें पूरी तरह स्थिर (बिना झपके) रहती हैं। वहीं शुक्रवार को समाजसेवी अनुराग चतुरमोहता और पंवार समाज के जिलाध्यक्ष विशाल बिसेन सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधियों ने झांकी स्थल पहुंचकर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने कहा कि ब्रम्हाकुमारी बहनों द्वारा प्रस्तुत यह जीवंत झांकी अद्भुत है। माँ के स्वरूप के दर्शन कर हम स्वयं को सुखी, संतोषी और सौभाग्यशाली मान रहे हैं। यह हमारी समृध्द संस्कृति का प्रतीक है, जो हमारी धार्मिक भावनाओं को और अधिक प्रबल करती है।
मातृशक्ति के सम्मान का संदेश
प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विवि. सेवा केंद्र लालबर्रा द्वारा प्रतिवर्ष समाज को मातृशक्ति की आराधना का अनूठा संदेश दिया जाता है। सेवा केंद्र की बहनों ने चर्चा के दौरान बताया कि इस चैतन्य झांकी प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि हम शारदीय नवरात्र पर्व के दौरान नौ दिनों तक तो माता-रानी की आराधना करते हैं, लेकिन घर-परिवार और समाज में विराजमान हमारी जीवित मातृशक्ति (बहनों व माताओं) का यथोचित सम्मान नहीं करते, जो कि अनुचित है। इसलिए इन चैतन्य झांकियों के माध्यम से यह प्रेरणा दी जाती है कि सभी लोग अपने जीवन में मातृशक्तियों का सम्मान करें।








































