हर रसोई तक गैस पहुंचाने के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की मुहिम महंगाई की भेंट चढ़ गई। गैस के बढ़ते दामों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का दम निकाल कर रख दिया। एलपीजी की कीमतें लगभग दोगुनी हो जाने से उज्जवला कनेक्शन धारक सिलेंडर नहीं भरवा पा रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को प्रदूषण मुक्त ईंधन उपलब्ध करवाने का सपना अधूरा है।
केंद्र सरकार के द्वारा गरीब परिवार की महिलाओं को चूल्हे के धूएं से आजादी दिलवाने के लिये प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को नि:शुल्क एलपीजी गैस कनेक्शन बांटे गये थे जिससे गरीब परिवारों की रसोई तक प्रदूषण मुक्त ईंधन पहुंच सके परंतु लगातार गैस की बढ़ती कीमतों के चलते एक बार फिर ये परिवार चूल्हे पर धुएं के बीच खाना बनाने के लिए मजबूर हैं। लालबर्रा ब्लाक के करीब ५० फीसदी उज्जवला योजना के लाभार्थी फिलहाल चूल्हे पर लकड़ी और कंडे के ईंधन से खाना बनाने मजबूर है।
पद्मेश न्यूज़ से चर्चा में गृहणी अंजीरा ब्रम्हे, सुशीला पटले, चंद्रकला ब्रम्हे ने बताया कि शासन के द्वारा शुरूआत में प्रलोभन देकर उज्ज्वला योजना के तहत नि:शुल्क गैस सिलेंडर प्रदान किया गया किन्तु अब गैस सिलेंडर के दाम दुगुना हो गये है जिसके चलते गैस सिलेंडर नही भरवा पा रहे है और पुन: मजबूरी में धुओं के बीच खाना बना रहे है, शासन-प्रशासन से मांग है कि गैस सिलेंडर के दाम लगभग ५० प्रतिशत कम करें।
रमेश पटले व आयुष पटले ने बताया कि केन्द्र व प्रदेश सरकार वाहवाही लूटने के लिए गैस सिलेंडर का वितरण उज्ज्वला योजना के तहत की किन्तु सरकार के द्वारा सिलेंडर वितरित कर दिये गये परन्तु महंगाई बढ़ाने के साथ ही सब्सिडी भी खत्म कर दी गई है।
औपचारिक चर्चा के दौरान गैस एजेंसी के कर्मचारियों ने बताया कि महंगाई की मार का सिलेंडर की बिक्री पर असर हुआ है जो पूरी तरह से दिखाई दे रहा है जिस कारण 50 फ़ीसदी तक सिलेंडर की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है।










































