इस असीम सृष्टि में आज भी कुछ ऐसी अदृश्य शक्तियां विद्यमान हैं, जो या तो अशरीरि है, अथवा तो नाग स्वरूप में रहकर लोक हित और लोक कल्याण के अपने संकल्प को पूर्ण कर रही है। ऐसी ही शक्तियों में विवेचना योग्य है बाबा रामदेवजी महाराज, सत्यवीर तेजाजी महाराज साईं बाबा ओर कमधज कल्लादेव महाराज। ओर यही नहीं बल्कि ओर भी ऐसी कई दृश्य और अदृश्य शक्तियां हैं, जिन्होंने शरीर के रहते हुए मनुष्यों के शारीरिक एवं मानसिक संताप को दूर कर उन्हें खुशियां लौटाई , किन्तु जब उनके शरीर का अवसान हो गया तो उन्होंने अदृश्य रूप में लोक कल्याण के अपने संकल्प को पूरा करना शुरू कर दिया। आज हम यहां महाप्रतापी जनहितकारी महापुरुष कल्लादेव महाराज का स्मरण करते हुए हम उन्हें सादर प्रणाम करते हैं, जिन्होंने 479 वर्ष पूर्व वीर प्रसूता भूमि राजस्थान में जन्म लिया था, ओर शरीरपात हो जाने के बाद आज भी देश के विभिन्न भागों में पूजे जाते हैं। शुक्रवार को इन्हीं कलादेव महाराज की जन्म जयंती थी।
कलादेव महाराज की जयंती पर जिला मुख्यालय सहित जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थित कलादेव मंदिरों और कलादेव के गादी स्थानों पर कल्लादेव महाराज का 479 वां जन्म जयंती महोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। मुख्य आयोजन थांदला जनपद मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर तलावली रोड स्थित श्री कल्लेश्वर महादेव मंदिर कमधज कल्ला राठौड़ धाम में सम्पन्न हुआ। यहां पर कल्लादेव महाराज के दो दिवसीय जन्म जयंती महोत्सव का शनिवार को पद्मावती नदी के पवित्र जल में निर्माल्य विसर्जन के साथ ही हर्षोल्लास पूर्वक समापन हुआ। समारोह के उपसंहार के पूर्व मंगला आरती की गई। शुक्रवार को कल्लादेव महाराज की 479वीं जन्म जयंती थी, ओर इस अवसर पर जिले में विभिन्न स्थानों पर स्थित कलादेव मंदिर एवं गादी स्थानों पर समारोह हुए। शुक्रवार सुबह पूजा अर्चना के साथ दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत हुई थी, जिसका शनिवार को समापन हो गया। इस अवसर पर जिले के झाबुआ, थान्दला, पेटलावद, काकनवानी ओर ग्राम करवड़ सहित विभिन्न स्थानों पर समारोह आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्री महाराज के अनुयायियों, स्थानीय निवासियों एवं गण्यमान्य नागरिकगणों सहित जिले के दूरस्थ अंचलों एवं समीपस्थ धार जिला एवं गुजरात प्रान्त से आए कल्लादेव के अनुयायियों ने भाग लिया। थांदला में महोत्सव पर आधा क्विंटल गुलाब के फूलों से कल्ला देव का श्रृंगार किया गया।
ऐसी मान्यता है कि कल्लाजी राठौड़ माता श्वेत कुंवर की शिव-भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी की असीम कृपा से राठौड़ कुल में प्रकट हुए थे। इतिहासिक तथ्यों के अनुसार इनके पिता मेड़ता के राव जयमल सरकार के छोटे भाई आसासिंह थे, ओर भक्तिमती मीराबाई इनकी बुआ थी। कल्लाजी की रुचि बचपन से सामान्य शिक्षा के साथ ओषधि विज्ञान योगाभ्यास शास्त्र के साथ शस्त्र की कला में रही थी। उनके द्वारा किशोरावस्था में ही उक्त सभी विषयों का ज्ञान प्राप्त कर लिया गया था। ओर बाद में वे विवेकवान, राष्ट्रभक्त, कर्तव्य परायण, धर्मपालक परहितकारी, धीरोधात्त महानतम योद्धा ओर वीर महापुरुष की श्रेणी में प्रतिष्ठित हुए। अंत में उन्होंने अपना समग्र जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। कहा जाता है कि शरीर के अवसान के बाद दूसरों के दुःख को दूर करने की अपनी प्रबल इच्छा शक्ति के रहते कलादेव महाराज विभिन्न साधकों के शरीर में पदार्पण कर उनके शारीरिक एवं मानसिक दुखों और प्रेत बाधाओं को दूर करते हैं। वर्तमान में देश में कई स्थानों पर कलादेव की गादी लगाई जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को अपनी समस्याओं से निजात मिलती है।
वर्तमान समय में भारत में कलादेव के अनेकों मंदिर या गादी स्थान हैं, जहां गादीधारी सेवक के माध्यम से कल्लाजी द्वारा शारीरिक एवं मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्तियों के अनेकों कष्टों का निवारण किया जा रहा हैं। मध्य प्रदेश सहित राजस्थान एवं गुजरात प्रान्त के अनेक स्थानों पर आज भी कलादेव की गादी लगाई जाती है।
श्री कल्लेश्वर महादेव मंदिर, कल्लेश्वर धाम थान्दला के सेवक एवं गादीपति गिरीशचन्द्र धानक ने हिन्दुस्थान समाचार को कहा कि कला राठौड़ के भौतिक शरीर के अवसान के बाद कल्लादेव महाराज कमधज स्वरूप में सेवकों के शरीर में प्रवेश कर उनके शारीरिक एवं मानसिक रोगों और प्रेतबाधाओं का निवारण करते हैं। धानक ने कहा कि जिले में विभिन्न स्थानों सहित मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात प्रान्त में कलादेव महाराज की करीब 13,000 गादियां विभिन्न स्थानों पर लगाई जा रही है, जहां पीड़ित व्यक्तियों का कष्ट दूर किया जा रहा है।









































