बीजिंग: एक चीनी कहावत है कि माहिर शिकारी खरगोश का पीछा नहीं करता है। वह खुद को उस जगह तैनात करता है, जहां खरगोश को दौड़कर आखिरकार आना होता है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को एक कम बोलने वाला और शांत व्यक्ति माना जाता है लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि वह चुपचाप दुनिया को ताकत दिखा रहे हैं और ग्लोबल पावर के नियमों में बदलाव ला रहे हैं। पुतिन और ट्रंप को बीजिंग लाकर उन्होंने ये दिखा दिया है। अमेरिका और खासतौर से रूस के बीजिंग के पाले में दिखने पर भारत की भी नजर लगी है। भारत के लिए इसके रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी नतीजे हो सकते हैं।
एशिया टाइम्स के मुताबिक, कुछ ही दिन के भीतर व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग का दौरा किया है। रूस और अमेरिका वर्तमान वैश्विक व्यवस्था के विपरीत छोरों पर है। दोनों देशों के नेताओं का बीजिंग जाना दिखाता है कि वास्तविक भूराजनीतिक शक्ति अब कहां है। बीजिंग अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। वह चुपचाप सोच-समझकर इसे नया आकार दे रहा है।










































