VPN कंपनियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में सरकार; जानिए क्या है नया प्लान

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भारत सरकार वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) सेवाओं को लेकर बड़ा कानूनी कदम उठाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार एक नए कानूनी ढांचे पर काम कर रही है, जिसके तहत VPN सेवा देने वाली कंपनियों को भारत में अपना स्थानीय कार्यालय खोलना पड़ सकता है। इसके साथ ही उन्हें सरकार के साथ समन्वय के लिए एक कंप्लायंस ऑफिसर और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति भी करनी पड़ सकती है।

2022 के Cert-In निर्देशों के बाद अब नए कानून की तैयारी

यह पहल 2022 में भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (Cert-In) द्वारा जारी किए गए निर्देशों के बाद सामने आई है। उस समय VPN सेवा प्रदाताओं को अपने ग्राहकों का नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और अन्य उपयोग संबंधी जानकारी पांच वर्षों तक सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि, कई प्रमुख VPN कंपनियों ने इन नियमों का पालन नहीं किया और अपने भारतीय सर्वर हटाकर ट्रैफिक को दूसरे देशों, खासकर सिंगापुर, के सर्वरों के जरिए रूट करना शुरू कर दिया। ऐसे में सरकार अब अधिक प्रभावी कानूनी व्यवस्था लाने पर विचार कर रही है।

सरकार की चिंता क्या है?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, VPN का इस्तेमाल तेजी से उन वेबसाइटों, ऐप्स और ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंचने के लिए किया जा रहा है, जिन्हें भारत में किसी कारणवश ब्लॉक किया गया है। VPN उपयोगकर्ताओं की वास्तविक लोकेशन छिपाकर इंटरनेट ट्रैफिक को दूसरे देशों के सर्वरों से गुजारते हैं, जिससे वे भारत में प्रतिबंधित कंटेंट तक भी पहुंच सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे कंटेंट ब्लॉकिंग की व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित होता है और मौजूदा नियम VPN कंपनियों पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रहे हैं।

स्थानीय कार्यालय और कंप्लायंस ऑफिसर हो सकते हैं अनिवार्य

प्रस्तावित कानूनी ढांचे के तहत VPN कंपनियों को भारत में कार्यालय स्थापित करने के साथ-साथ ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ सकती है, जो सरकार की शिकायतों और निर्देशों का समय पर जवाब दें। यह व्यवस्था काफी हद तक आईटी नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों पर लागू प्रावधानों जैसी हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि कोई कंपनी नए नियमों का पालन नहीं करती है तो स्थानीय कर्मचारियों के खिलाफ जुर्माने के साथ जेल जैसी दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान किया जा सकता है।

कंटेंट ब्लॉकिंग के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

हाल के वर्षों में भारत में ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक करने की कार्रवाई में तेजी आई है। वर्ष 2025 में सरकार ने 24,000 से अधिक कंटेंट ब्लॉकिंग आदेश जारी किए, जबकि 2024 में यह संख्या 12,000 से अधिक थी। ऐसे में VPN सेवाओं के जरिए इन प्रतिबंधों को दरकिनार किए जाने को सरकार गंभीर चुनौती मान रही है।

Telegram ब्लॉक होने के दौरान बढ़ी थी VPN की मांग

हाल ही में NEET-UG री-टेस्ट से पहले जब सरकार ने कुछ समय के लिए Telegram की सेवाओं पर रोक लगाई थी, तब प्रमुख VPN सेवा Proton VPN ने दावा किया था कि भारत से उसके नए रजिस्ट्रेशन में 120 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद Proton VPN के महाप्रबंधक की सोशल मीडिया पोस्ट और उनका अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया था।

VPN कंपनियों ने पहले भी जताया था विरोध

2022 के Cert-In निर्देश लागू होने के बाद Proton VPN, NordVPN, ExpressVPN और Surfshark जैसी कंपनियों ने भारत में अपने फिजिकल सर्वर हटा लिए थे। Proton VPN ने उस समय कहा था कि वह ऐसे नियमों का पालन नहीं करेगा जिन्हें वह “व्यापक निगरानी” (Mass Surveillance) से जुड़ा मानता है, इसलिए कंपनी ने भारतीय क्षेत्राधिकार से अपने सर्वर हटाने का फैसला लिया।

क्या होगा इसका असर?

अगर सरकार प्रस्तावित कानून लागू करती है, तो भारत में काम करने वाली VPN कंपनियों को स्थानीय नियमों का पालन करना अनिवार्य हो सकता है। इससे एक ओर सरकार के लिए ऑनलाइन नियमों को लागू करना आसान होगा, वहीं दूसरी ओर यूजर्स की ऑनलाइन गोपनीयता और इंटरनेट स्वतंत्रता को लेकर नई बहस भी तेज हो सकती है। फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।

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