अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हवाई हमलों की आशंका के बीच इराक से ऐसे संकेत मिले हैं, जिनको एक्सपर्ट एक बार फिर युद्ध की शुरुआत की तरह देख रहे हैं। इराक में एयर डिफेंस को निशाना बनाया गया है।बगदाद: इराक की राजधानी बगदाद में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए गए हैं। बगदाद को शक है कि पिछले हफ्ते हुए इन हवाई हमलों में दो ऐसी जगहों को निशाना बनाया गया, जहां चीन में बने मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (कंधे पर रखकर चलाए जाने वाला एयर डिफेंस) रखे गए थे। इन हमलों के बाद अधिकारी एक खुफिया रिपोर्ट की जांच कर रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग शायद पहले ही शुरू हो चुकी है। यह जंग आधिकारिक तौर पर युद्ध के ऐलान से पहले इराकी धरती पर हो रहा है।
सऊदी बेस्ड अशर्क अल-अवसत की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि जिन दो जगहों पर हमले का शक है, वहां चीन में बने एयर डिफेंस सिस्टम की बड़ी खेप रखी गई थी। यह खेप हाल ही में ईरान से आई थी। जिस सशस्त्र गुट ने एयर डिफेंस सिस्टम रखने के लिए यह जगह चुनी थी, उसे लगा था कि यहां तक पहुंचना बहुत मुश्किल होगा। यह संदिग्ध हमला तब हुआ, जब ये खेपें उन दो जगहों पर पहुंची ही थीं।ईराक में किए जा रहे हवाई हमले
एक अन्य सूत्र ने बताया कि यह धमाका उन कई विस्फोटों की कड़ी का हिस्सा है, जो 1 अक्टूबर से शुरू हुए थे। इन हमलों में बगदाद के आसपास के इलाकों में मौजूद सशस्त्र गुटों के गोदामों को निशाना बनाया गया था। इनमें वे ठिकाने भी शामिल थे, जहां आत्मघाती हमलों और जासूसी (रेकी) के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन रखे गए थे।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से कई सशस्त्र गुट ईरान से इराक में अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन ला रहे हैं और उन्हें अपने नियंत्रण वाले ठिकानों पर जमा कर रहे हैं। चीन से ईरान भेजी गई सीक्रेट खेपों में हीट-सीकिंग मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम शामिल थे। इन्हें कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों- जैसे हेलीकॉप्टर और ड्रोन को मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है।हमले के पीछे इजरायली सेना
यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि ये हमले लड़ाकू विमानों से या फिर ड्रोन से किए गए। अलग-अलग रिपोर्टों में बताया गया है कि ईरानी सीमा के पास इराकी हवाई क्षेत्र से इजरायली लड़ाकू विमान गुजरे। एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि बगदाद के अधिकारियों के पास यह मानने के लिए पर्याप्त आधार हैं कि गोदामों पर हुए इन हमलों के पीछे इजरायल का हाथ है, हालांकि वे अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि हमले किस तरह किए गए।एक वरिष्ठ राजनीतिक सलाहकार ने कहा कि यह हमला इराकी खुफिया हलकों के इस आकलन को दर्शाता है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध फिर से शुरू हो चुका है। यह युद्ध इराकी धरती पर चुपचाप और बिना किसी आधिकारिक घोषणा के शुरू हुआ है। इस अभियान में सशस्त्र गुटों की आपूर्ति लाइनों को निशाना बनाना और हथियारों की खेप को रोकना शामिल है, ताकि उन्हें किसी भी नए क्षेत्रीय टकराव में हिस्सा लेने से रोका जा सके।
ईरान के सहयोगियों पर निशाना
कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि एक्सपर्ट लगातार ये मान रहे थे कि ईरान-अमेरिका में फिर से युद्ध छिड़ता है तो इसकी शुरुआत इराकी सशस्त्र गुटों की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करने से होगी। अब ये आंकलन ठीक होता दिख रहा है। इराक के हमले ईरान पर पूर्ण हमले से पहले की ‘प्रक्रिया’ हो सकती है।








































