उमरवाड़ा मार्ग पर पुलिया बनी परेशानी राहगीरों की जान जोखिम में

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पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बांसी से उमरवाड़ा को जोडऩे वाला मुख्य मार्ग इन दिनों राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। डामर की पक्की सडक़ के बीचों बीच स्थित एक अधूरी और असुरक्षित पुलिया लगातार बड़ी दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रही है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि वर्षों पूर्व सडक़ का निर्माण तो हुआ लेकिन पुलिया के हिस्से को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया।

डामर की सडक़ पुलिया पर गिट्टी का ढेर

हैरानी की बात यह है कि बांसी से उमरवाड़ा तक डामर सडक़ बनी हुई है लेकिन पुलिया के १०० फ ीट पहले डामरीकरण रोक दिया गया है। पुलिया पार करने के १०० फ ीट बाद पुन: पक्की सडक़ शुरू होती है। इस बीच के हिस्से में केवल गिट्टी बिछाकर छोड़ दिया गया है। मुख्य मार्ग से तेज गति से आने वाले वाहन जैसे ही अचानक इस कच्ची गिट्टी वाली जगह पर पहुँचते हैं वे अनियंत्रित हो जाते हैं। विशेष रूप से दुपहिया वाहन चालक यहाँ फि सलकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। पुलिया निर्माण में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। पुलिया के ऊपर ना तो कोई सेफ्टी वॉल सुरक्षा दीवार बनाई गई है और ना ही रेलिंग लगाई गई है। पुलिया के दोनों छोर पर करीब ९ इंच से अधिक ऊँचे लोहे के नुकीले एंगल निकले हुए हैं। पुलिया इतनी संकरी है कि दो भारी वाहन एक साथ क्रॉस नहीं हो सकते। यदि क्रॉसिंग के दौरान कोई वाहन अनियंत्रित होता है तो ये निकले हुए एंगल राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। यह मार्ग वारासिवनी मुख्यालय पहुँचने का सबसे सुगम और छोटा रास्ता है, जिसके कारण प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग यहाँ से गुजरते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या स्कूली विद्यार्थियों और कॉलेज जाने वाले युवाओं की है। भारी वाहनों के दबाव और पुलिया की बदहाली के कारण यहाँ हर वक्त धूल के गुब्बार उडऩा और दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है।

निर्माण एजेंसी ने अनसुनी की ग्रामीणों की पुकार

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब इस सडक़ और पुलिया का निर्माण हो रहा था तभी उन्होंने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी का ध्यान इस तकनीकी खामी की ओर आकर्षित कराया था। ग्रामीणों ने मांग की थी कि पुलिया के ऊपर भी डामरीकरण हो और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, लेकिन जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद सोए रहे। क्षेत्र के नागरिकों ने विभाग और कार्य एजेंसी से मांग की है कि पुलिया के दोनों ओर निकले खतरनाक लोहे के एंगलों को हटाये पुलिया पर तत्काल पक्की रेलिंग या सेफ्टी वॉल का निर्माण हो गिट्टी वाले कच्चे हिस्से पर तुरंत डामरीकरण किया जाए ताकि आवागमन सुरक्षित हो सके। क्योंकि यदि समय रहते इस पुलिया की सुध नहीं ली गई तो यहाँ कभी भी कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।

गिट्टी से धूल का गुबार इतना ज्यादा है कि सामने वाहन दिखाई नहीं देते -सुरेन्द्र जमुरकर

सुरेन्द्र जमुरकर ने बताया की उमरवाड़ा मार्ग पर स्थित इस पुलिया की हालत पिछले कई वर्षों से जस की तस बनी हुई है। पूरे मार्ग पर पक्की सडक़ है लेकिन पुलिया के दोनों ओर का हिस्सा कच्चा और उबड़ खाबड़ होने के कारण यहाँ गिट्टी बिछा दी गई है इससे गुजरना जोखिम भरा हो गया है। पुलिया पर कोई सुरक्षा नही हैं गिट्टी से धूल का गुबार इतना ज्यादा उड़ता है कि सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते। विभाग को चाहिए कि इस पुलिया के ऊपर और दोनों तरफ डामरीकरण कर इसे व्यवस्थित बनाए ताकि राहगीर बिना किसी डर के आवागमन कर सकें। क्योंकि हर समय इस पुलिया पर लोगों को डर लगा रहता है भारी वाहन आते हुए दिखता है तो पहले ही दूर किनारे पर मोटरसाइकिल रोक कर खड़ा हो जाना पड़ता है।

पुलिया पर रेलिंग नहीं है जो चिंता का विषय है- तुलसीराम जैतवार

तुलसीराम जैतवार ने बताया की इस पुलिया पर सुरक्षा के नाम पर कोई दीवार या रेलिंग नहीं लगाई गई है जो सबसे बड़ी चिंता का विषय है। रात के समय पुलिया की चौड़ाई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुपहिया वाहन चालक अनियंत्रित होकर झाडिय़ों या नीचे गिर सकते हैं। कई बार भारी वाहनों के आने पर मोटरसाइकिल वालों के लिए साइड में कोई सपोर्ट नहीं बचता। ४.५ साल से सडक़ बनी हुई है लेकिन पुलिया के पास का यह अधूरा निर्माण हादसों को न्यौता दे रहा है। यह मार्ग उमरवाड़ा होते हुए सीधे रामपायली के लिए निकलता है इसलिए इस क्षेत्र के लोग यहीं से आना जाना करते हैं दिन में तो जैसे तैसे आना हो जाता है। रात्रि में बहुत दिक्कत होती है और दुर्घटनाएं भी होती है। हमारी मांग है कि यहाँ जल्द से जल्द सेफ्टी रेलिंग और पक्की सडक़ का निर्माण किया जाए।

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