कलेक्टर मृणाल मीणा का जिला अस्पताल में औचक निरीक्षण, डॉक्टरों की लेटलतीफी पर जताई नाराजगी

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कलेक्टर मृणाल मीना ने 23 अप्रैल को एक बार फिर जिला चिकित्सालय पहुंचकर अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न वार्डों का भ्रमण कर मरीजों को मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अस्पताल पहुंचते ही कलेक्टर ने सबसे पहले डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपस्थिति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान कुछ स्वास्थ्य कर्मी अनुपस्थित पाए जाने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि सभी डॉक्टर एवं कर्मचारी समय पर अपनी ड्यूटी पर उपस्थित रहें। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कोविड काल में बनाए गए गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) का भी निरीक्षण किया। यहां शौचालय और वॉशरूम की स्थिति खराब मिलने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। साथ ही कई महीनों से बंद पड़े एसी को जल्द सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने पुराने कोविड आईसीयू को नए गहन चिकित्सा केंद्र में शिफ्ट करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

जिले अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक बेहतर एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर मृणाल मीणा ने गुरूवार को जिला चिकित्सालय बालाघाट का औचक निरीक्षण किया। अचानक पहुंचे कलेक्टर ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण करते हुए विभिन्न वार्डों का दौरा किया और मरीजों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और सुविधाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अस्पताल की ओपीडी, नेत्र वार्ड, बर्न वार्ड, दंत वार्ड, मेडिकल वार्ड, ऑर्थोपेडिक वार्ड, हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) तथा जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) का भ्रमण किया। उन्होंने प्रत्येक वार्ड की व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा और भर्ती मरीजों से उपचार, दवाइयों और अन्य सुविधाओं को लेकर फीडबैक लिया। कलेक्टर मृणाल मीणा ने अस्पताल में डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी चिकित्सक निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचे और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराएं। लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में निर्माणाधीन आई वार्ड और बर्न वार्ड के कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही पुराने आईसीयू को कोविड काल में तैयार किए गए नए आईसीयू में शिफ्ट करने तथा पुराने आईसीयू के सुधार कार्य जल्द शुरू करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए। अस्पताल भवन में शौचालय, वॉशरूम और सीपेज से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने लगभग 48 लाख रुपये के सिविल कार्यों को जल्द स्वीकृति दिलाकर प्रारंभ कराने पर जोर दिया। कलेक्टर ने अस्पताल में स्थापित सीटी स्कैन मशीन के पंजीयन को लेकर भी गंभीरता दिखाई। उन्होंने पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत मशीन का तत्काल पंजीयन कराने के निर्देश दिए और इसमें देरी होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी कलेक्टर ने विशेष निर्देश दिए। उन्होंने सिविल सर्जन को अस्पताल परिसर में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और कहा कि मरीजों को सभी आवश्यक दवाइयां अस्पताल से ही उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें बाहर से दवाइयां खरीदने की मजबूरी न हो। गर्मी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कलेक्टर ने सभी वार्डों में कूलर और पंखों को सुचारू रूप से चालू रखने के निर्देश दिए। जिन वार्डों में एयर कंडीशनर लगे हैं, उन्हें भी नियमित रूप से संचालित रखने को कहा गया। निरीक्षण के दौरान कई मरीजों ने अस्पताल में मिल रही चिकित्सा सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया, हालांकि कुछ लोगों ने शौचालय और स्वच्छता व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता भी बताई।

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