गर्मियों के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही वोल्टेज में उतार-चढ़ाव (Voltage Fluctuation) की समस्या भी आम हो जाती है। अक्सर हम देखते हैं कि घर की लाइटें बार-बार ट्रिप होती हैं या डिम हो जाती हैं। ऐसे समय में ज्यादातर लोग इनवर्टर को ही समाधान मान लेते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इनवर्टर केवल पावर कट के दौरान बैकअप देता है। वोल्टेज के अचानक कम या ज्यादा होने से आपके महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे एसी (AC), टीवी (TV), और फ्रिज (Fridge) को जो खतरा होता है, उससे बचाने के लिए एक ‘स्टेबलाइजर’ (Stabilizer) की सख्त जरूरत होती है।
लाखों के नुकसान से बचाने वाला सुरक्षा कवच
आजकल के आधुनिक घरों में लाखों रुपये के गैजेट्स और अप्लायंसेज लगे होते हैं। एक हाई-वोल्टेज का झटका आपके इन्वर्टर एसी या स्मार्ट टीवी के पीसीबी (PCB) को पल भर में फूंक सकता है। स्टेबलाइजर एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो बिजली की सप्लाई को मॉनिटर करता है और आपके उपकरणों तक केवल उतनी ही बिजली पहुंचने देता है जितनी उनके लिए सुरक्षित है। अगर पीछे से वोल्टेज बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह डिवाइस पावर सप्लाई को काट देता है, जिससे आपके कीमती उपकरण जलने से बच जाते हैं और आपका लाखों का नुकसान होने से रुक जाता है।
क्या आपके पास है स्टेबलाइजर?
बाजार में अब कई ऐसे आधुनिक फ्रिज और एसी आ रहे हैं जो ‘स्टेबलाइजर-फ्री ऑपरेशन’ का दावा करते हैं। इसका मतलब है कि इन उपकरणों के अंदर पहले से ही एक छोटा स्टेबलाइजर सर्किट लगा होता है। हालांकि, जहां वोल्टेज का उतार-चढ़ाव बहुत अधिक और बार-बार होता है, वहां बाहरी स्टेबलाइजर लगाना हमेशा एक समझदारी भरा फैसला होता है। यह आपके उपकरण की उम्र को बढ़ाता है और उसे तकनीकी खराबी से सुरक्षित रखता है। खास तौर पर एयर कंडीशनर जैसे भारी बिजली खींचने वाले उपकरणों के लिए एक समर्पित स्टेबलाइजर लगाना अनिवार्य माना जाना चाहिए।
सही स्टेबलाइजर का चुनाव कैसे करें?
स्टेबलाइजर खरीदते समय आपको अपने उपकरण की क्षमता यानी ‘लोड’ का ध्यान रखना चाहिए। उदाहरण के लिए, एक फ्रिज के लिए अलग और डेढ़ टन के एसी के लिए अलग क्षमता वाला स्टेबलाइजर चाहिए होता है। हमेशा आईएसआई (ISI) मार्क वाले और ब्रांडेड स्टेबलाइजर का ही चुनाव करें, क्योंकि स्थानीय और घटिया क्वालिटी के डिवाइस खुद भी आग पकड़ सकते हैं और आपके घर की वायरिंग को नुकसान पहुंचा सकते हैं। डिजिटल डिस्प्ले वाले स्टेबलाइजर और भी बेहतर होते हैं क्योंकि वे आपको रियल-टाइम में इनपुट और आउटपुट वोल्टेज की जानकारी देते रहते हैं।









































