भारत में फोल्डेबल स्मार्टफोन का भविष्य कितना मजबूत? AI और प्रीमियम अनुभव बढ़ा रहे हैं मांग

0

फोल्डेबल स्मार्टफोन अब केवल तकनीक का प्रदर्शन भर नहीं रह गए हैं, बल्कि धीरे-धीरे प्रीमियम यूजर्स के लिए रोजमर्रा के इस्तेमाल का हिस्सा बनते जा रहे हैं। Samsung ने हाल ही में अपनी आठवीं जेनरेशन के फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च किए हैं, जिनमें पहली बार Ultra मॉडल भी शामिल किया गया है। कंपनी का दावा है कि भारतीय यूजर्स अब फोल्डेबल फोन का इस्तेमाल सिर्फ बड़े डिस्प्ले पर वीडियो देखने के लिए नहीं, बल्कि मल्टीटास्किंग, फोटोग्राफी और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी कर रहे हैं।

मार्केट रिसर्च फर्म Counterpoint के अनुसार, भारत में 2026 के अंत तक फोल्डेबल स्मार्टफोन की बिक्री 30 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर सकती है। वहीं, 2026 में इस सेगमेंट की शिपमेंट में करीब 8% सालाना वृद्धि (YoY) का अनुमान है, जो पूरे स्मार्टफोन बाजार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है।

भारत के फोल्डेबल बाजार में Samsung का दबदबा

भारतीय फोल्डेबल स्मार्टफोन बाजार में फिलहाल Samsung सबसे मजबूत खिलाड़ी बना हुआ है। कंपनी कई वर्षों से Fold और Flip सीरीज के जरिए इस सेगमेंट में मौजूद है और लगातार अपने डिवाइस की मजबूती, डिजाइन और सॉफ्टवेयर अनुभव को बेहतर बना रही है।

Samsung ने फोल्डेबल स्क्रीन के लिए खास ऐप लेआउट और मल्टीटास्किंग फीचर्स भी विकसित किए हैं, जिससे यूजर्स को बड़े डिस्प्ले का पूरा फायदा मिलता है। अनुमान है कि इस साल भारत में फोल्डेबल स्मार्टफोन की कुल शिपमेंट में करीब 89% हिस्सेदारी Samsung की होगी।

दूसरे ब्रांड भी बढ़ा रहे हैं मौजूदगी

Google ने अब तक दो फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च किए हैं, लेकिन भारत में उसकी ऑफलाइन मौजूदगी और आफ्टर-सेल्स सर्विस सीमित होने के कारण ब्रांड को ज्यादा स्वीकार्यता नहीं मिल पाई है। वहीं, Vivo ने भी दो फोल्डेबल फोन पेश किए हैं और बेहतर डिजाइन तथा मजबूती के दम पर ग्राहकों का ध्यान खींचा है।

Motorola लंबे समय तक अपनी Razr Flip सीरीज पर फोकस करता रहा, लेकिन मई 2026 में कंपनी ने भारत में अपना पहला बुक-स्टाइल फोल्डेबल फोन लॉन्च कर इस बाजार में नई शुरुआत की। दूसरी ओर, Oppo ने अभी तक भारत में केवल फ्लिप स्मार्टफोन ही पेश किए हैं।

फोल्डेबल फोन के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां?

फोल्डेबल स्मार्टफोन की सबसे बड़ी चुनौती उसकी मजबूती को लेकर बनी धारणा है। महंगे होने के साथ-साथ इन डिवाइस को दिन में कई बार मोड़ा और खोला जाता है, इसलिए कई ग्राहक इन्हें नाजुक मानते हैं। इसके अलावा, स्क्रीन के बीच दिखाई देने वाली क्रीज भी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है।

लगातार इस्तेमाल के साथ यह और स्पष्ट हो सकती है, हालांकि नई पीढ़ी के फोल्डेबल फोन में पहले की तुलना में मजबूत हिंज दिए जा रहे हैं, जो लाखों बार फोल्ड और अनफोल्ड होने के बाद भी कई वर्षों तक टिकाऊ रहने का दावा करते हैं। एक अन्य चुनौती ऐप ऑप्टिमाइजेशन और स्क्रीन के अलग-अलग आस्पेक्ट रेशियो को लेकर भी है। इस मामले में Samsung को सबसे आगे माना जाता है, जिसने फोल्डेबल डिस्प्ले के लिए बेहतर सॉफ्टवेयर अनुभव तैयार किया है।

AI बदल रहा है फोल्डेबल फोन का इस्तेमाल

ऑन-डिवाइस AI (On-device AI) के बढ़ते उपयोग के साथ फोल्डेबल स्मार्टफोन की उपयोगिता भी बढ़ रही है। इन प्रीमियम डिवाइस में शक्तिशाली Neural Processing Unit (NPU) दिए जाते हैं, जिससे कई AI फीचर सीधे फोन पर ही काम करते हैं और क्लाउड पर निर्भरता कम होती है।

बड़े डिस्प्ले की वजह से मल्टीटास्किंग, स्प्लिट-स्क्रीन, कंटेंट एडिटिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग और AI आधारित फीचर्स का अनुभव भी बेहतर हो गया है। यही वजह है कि अब फोल्डेबल फोन केवल बिजनेस यूजर्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कंटेंट क्रिएटर्स और प्रोफेशनल्स के बीच भी लोकप्रिय हो रहे हैं।

क्या फ्लिप फोन का भविष्य भी उतना ही मजबूत है?

रिपोर्ट के अनुसार, बुक-स्टाइल फोल्डेबल फोन का भविष्य फ्लिप फोन की तुलना में अधिक मजबूत माना जा रहा है। बड़े कवर डिस्प्ले और टैबलेट जैसे मुख्य स्क्रीन के कारण ये डिवाइस काम और मनोरंजन दोनों के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो रहे हैं। वहीं, फ्लिप फोन अभी भी स्टाइल और कॉम्पैक्ट डिजाइन पसंद करने वाले ग्राहकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन उत्पादकता के मामले में बुक-स्टाइल मॉडल उनसे आगे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here