नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के बीच मचे घमासान ने आईपीएल 2026 के फाइनल का वेन्यू ही बदल दिया। वेन्यू को चिन्नास्वामी स्टेडियम से नरेंद्र मोदी स्टेडियम में बदल दिया गया है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने इस विवाद की परतों को खोला और बताया कि कैसे कॉम्प्लिमेंट्री टिकटों के लालच ने बेंगलुरु से एक ऐतिहासिक मौका छीन लिया। प्रोटोकॉल के मुताबिक, मेजबान एसोसिएशन को केवल 15% मुफ्त टिकट मिलते हैं, लेकिन KSCA ने इस मर्यादा को लांघते हुए हजारों अतिरिक्त टिकटों की जिद पकड़ ली थी। जब बीसीसीआई ने सख्ती दिखाई, तो हकीकत सामने आई कि ये टिकट किसी और के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय रसूखदारों को बांटने के लिए मांगे जा रहे थे।
MLA, MLC और सरकार, 10,000 टिकटों की फ्री लूट
सैकिया ने बताया कि 2 मई को जब KSCA का ईमेल मिला, तो बोर्ड के अधिकारी हैरान रह गए। कर्नाटक एसोसिएशन ने अपने सदस्यों और क्लबों के अलावा कर्नाटक सरकार के लिए 700 टिकट और स्थानीय विधायकों व विधान परिषद सदस्यों के लिए भारी संख्या में मुफ्त टिकटों की मांग की थी। कुल मिलाकर यह आंकड़ा निर्धारित कोटे से 10,000 टिकट ऊपर जा रहा था। बोर्ड ने साफ कर दिया कि आईपीएल जैसे प्रोफेशनल टूर्नामेंट में इस तरह की पॉलिटिकल टिकटिंग को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। यही कारण है कि चैंपियन टीम RCB का घरेलू मैदान होने के बावजूद चिन्नास्वामी स्टेडियम से फाइनल की मेजबानी वापस ले ली गई।










































