नई दिल्ली: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी PNC इन्फ्राटेक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इसकी सड़क उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर धंस गई थी। NHAI ने इस एक्सप्रेसवे को बनाने वाली कंपनी PNC इन्फ्राटेक पर तीन साल के लिए बैन लगा दिया है। कंपनी एनएचएआई के किसी भी प्रोजेक्ट के लिए अगले तीन साल बोली लगा सकती है। कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार यह सबसे बड़ी सजा है।
इससे मंगलवार को कंपनी के शेयरों में 20% की भारी गिरावट आई। आज भी शुरुआती कारोबार में यह करीब 15 फीसदी तक गिर गया। बीएसई पर यह पिछले सत्र में 140.40 रुपये पर बंद हुआ था और आज 130.10 रुपये पर खुला। कारोबार के दौरान यह 116.25 रुपये तक गिरा जो इसका 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर है। इसका 3 साल का उच्चतम स्तर 325.15 रुपये है। पिछले साल 17 सितंबर को यह इस स्तर पर पहुंचा था।
डिजाइन में कमी
टीओआई के अधिकारियों ने कहा था कि अवध एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में समय से पहले आई ये खराबियां डिजाइन की कमी के कारण थीं और सिर्फ पैचवर्क से काम नहीं चलेगा। IIT-खड़गपुर के एक प्रोफेसर की जांच में प्रभावित हिस्सों को पूरी तरह से दोबारा बनाने की सिफारिश की गई थी।
कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार NHAI ने 11 सितंबर को प्रतिबंध का पत्र जारी किया था। कंपनी ने यह भी साफ किया कि इस कार्रवाई का उसके मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वह इस आदेश के खिलाफ़ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। यह प्रोजेक्ट ‘हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल’ के तहत पूरा किया गया था, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट की अवधि के दौरान रखरखाव की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनी की होती है।
एनएचएआई को देना होगा मुआवजा
यह अपनी तरह का पहला मामला भी है जिसमें पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली रोक दी गई है। कंपनी को इस अवधि के दौरान टोल से होने वाले नुकसान की भरपाई NHAI को करनी होगी। जब तक पूरा कॉरिडोर पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक रोजाना लगभग 42 लाख रुपये का मुआवजा देने का अनुमान है।






































