गणेश विसर्जन शुरू, अगले बरस का वादा करके बप्पा अपने धाम चले

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डाेल ग्यारस के साथ शुरू हुआ गणेश विसर्जन का सिलसिला शनिवार काे भी जारी रहा। लाेग धूमधाम से गणेश प्रतिमा काे विसर्जन करने के लिए सागरताल पहुंचे। वहीं कुछ लाेगाें ने घराें में भी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया। इसके बाद लाेगाें ने उस पानी काे अपने घराें में लगाए गए पाैधाें में डाल दिया। गणेश विसर्जन का सिलसिला शुरू हाेते ही सागरताल पर भीड़ काफी बढ़ गई है, ऐसे में सुरक्षा के लिए पुलिस फाेर्स भी तैनात किया गया है। साथ ही गाेताखाेर भी यहां पर रखे गए हैं।

ज्याेतिषाचार्य सतीश सोनी के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष को चतुर्थी को अनंत चौदस मनाई जाएगी। इस दिन गणेश महोत्सव का समापन गणेश विसर्जन के साथ होगा। ग्रह नक्षत्रों की बात करें तो इस दिन मंगल, बुध, और सूर्य एक साथ कन्या राशि में होने से मंगल बुध आदित्य योग का निर्माण हो रहा है। इस विशेष योग में भगवान गणेश का विसर्जन तथा भगवान विष्णु की पूजा करने का महत्व अधिक बढ़ गया है। इस दिन व्रत रखकर विष्णु जी को कपड़े या रेशम से बना 14 गांठ वाला अनंत सूत्र समर्पित करके बांधने का विधान है।

काैन हैं अनंत भगवान: पौराणिक कथाओं के अनुसार अनंत चतुर्दशी पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। ऐसी मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी के दिन ही भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना की थी। सृष्टि रचना की शुरुआत में 14 लोकों का निर्माण किया था। जिनमें तल ,अतल, वितल, सुतल, तलाताल, रसातल, पाताल, भू, भूतल, स्व ,जन सत्य, मह शामिल हैं। इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु स्वयं 14 रूप में प्रकट हुए। अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला माना गया है।

बारिश के बीच बप्पा को दी विदाई, किया विसर्जन: डोल ग्यारस पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीगणेश का विसर्जन किया। श्रद्धालुओं ने सागरताल जाकर विघ्नहर्ता की प्रतिमाओं का श्रद्धाभाव के साथ विसर्जन किया, हालांकि बहुत ही कम प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया है। बारिश के बीच लोग विघ्नहर्ता का विसर्जन करने के लिए पहुंचे।

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