मियामी: लगभग आखिरी स्टेज तक पहुंचकर खिताबी सपना टूटने के बाद तीसरे स्थान के लिए खेलना आसान नहीं होता। दोनों टीमों के खिलाड़ियों का मनोबल गिरा होता है और कंधे झुके होते हैं। हालांकि, खिताब की रेस से बाहर होने का दर्द भूलकर फ्रांस और इंग्लैंड की टीमें जब मैच में उतरेंगी तो बहुत कुछ दांव पर होगा। फ्रेंच टीम के लिए इस मैच में एक मोटिवेशन यह होगा कि वह कोच दिदिए देशो को जीत के साथ विदाई देना चाहेगी। भले ही यह मैच ट्रॉफी के लिए न हो, लेकिन व्यक्तिगत पुरस्कारों के लिहाज से इसका महत्व बहुत बढ़ जाता है। इस मैच में गोल्डेन बूट की रेस का फैसला हो सकता है।
गोल्डन बूट का रेस में इंग्लैंड और फ्रांस के खिलाड़ी
फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बापे (8 गोल) टॉप पर चल रहे लियोनेल मेसी को पछाड़ने की कोशिश करेंगे। वहीं इंग्लैंड के जूड बेलिंघम और हैरी केन (दोनों के 6-6 गोल) भी इस व्यक्तिगत गौरव को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे। फीफा ने आधिकारिक तौर पर इसे ब्रॉन्ज फाइनल का नाम दिया है। मेडल के अलावा इसके साथ बड़ी इनामी राशि भी जुड़ी हुई है। तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 289 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि मिलेगी, जो चौथे स्थान पर रहने वाली टीम से 2 मिलियन डॉलर अधिक है। इस मैच को जीतने से फीफा रैंकिंग्स में भी महत्वपूर्ण अंक मिलते हैं।










































