ओंकारेश्वर (खंडवा)। तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में नर्मदा घाटों पर डूबने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले एक सप्ताह में छह से अधिक हादसे सामने आ चुके हैं। इनमें कई श्रद्धालुओं को नाविकों, होमगार्ड और एसडीइआरएफ के संयुक्त प्रयास से सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि कुछ श्रद्धालु नर्मदा की गहराइयों में समाकर अपनी जान गंवा चुके हैं। शनिवार सुबह गौमुख घाट पर हुई एक और घटना ने घाटों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।शनिवार सुबह करीब आठ बजे तेलंगाना निवासी 18 वर्षीय कल्याण, जो गुजरात के बड़ौदा स्थित पारुल यूनिवर्सिटी में बीटेक द्वितीय वर्ष का छात्र है, अपने छह साथियों के साथ भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए आया था। दर्शन से पहले सभी गौमुख घाट पर स्नान कर रहे थे। इसी दौरान कल्याण का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में डूबने लगा।साथियों के शोर मचाने पर नाविक जयराम भंवरिया की सतर्कता से स्थानीय युवक किशन गोलकर ने बिना देर किए नदी में छलांग लगा दी। गोताखोर तुकाराम केवट के साथ मिलकर उन्होंने छात्र को बाहर निकाला। घाट पर जयराम भंवरिया, राजू मेघवाल, एसडीइआरएफ जवान नागेंद्र शर्मा, नरसिंह पवार और वीरेंद्र वर्मा ने प्राथमिक उपचार देकर उसकी सांसें सामान्य करने का प्रयास किया। बाद में उसे सिविल अस्पताल ओंकारेश्वर ले जाया गया, जहां डॉ. रवि वर्मा और मेडिकल स्टाफ ने उपचार शुरू किया। ऑक्सीजन की कमी और गंभीर स्थिति को देखते हुए छात्र को बेहतर इलाज के लिए सनावद रेफर किया गया।
घटना की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार उदय मंडलोई भी अस्पताल पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली।
लगातार हो रहे हादसों के बाद स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से सभी प्रमुख घाटों पर स्थायी गोताखोरों की तैनाती, एसडीइआरएफ को आधुनिक रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध कराने, चेतावनी संकेत बढ़ाने और संवेदनशील घाटों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आस्था की नगरी में ऐसे हादसे आगे भी लोगों की जान लेते रहेंगे।
संगम घाट के निकट अस्थाई पुल भी सुरक्षित नहीं
ओंकारेश्वर के घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से लोग नर्मदा में डूब रहे है, वहीं ओंकाररेश्वर में अभय घाट से बाबा बर्फानी धाम को जोड़ने वाला ब्रिज लंबे समय से अधूरा होने से यहां ओंकार पर्वत पर आवाजाही के लिए बनाया गया अस्थायी पुल भी हादसों की वजह बन रहा है। बीती रात पुल से बाइक नर्मदा नदी में फिसलने से तीन लोगों को डूबने से बचाया गया। तीनो व्यक्ति अध्यात्म धाम के शंकराचार्य प्रोजेक्ट में कार्यरत एलएंडटी कंपनी के कर्मचारी सचिन यादव, रामजी पाल और कौशल पाल थे। स्थानीय लोगों की त्वरित सूझबूझ से तीनों की जान बच गई, लेकिन बाइक नदी में बह गई।
घटना के बाद क्षेत्रवासियों ने कहा कि बांध से बिजली बनाने के दौरान टरबाइन से रात में पानी छोड़े जाने पर कई बार अस्थाई पुल डूब जाता है। वर्षा के मौसम में भी इस अस्थायी पुल से आवाजाही में खतरा बना रहता है। पुल पर न तो प्रभावी बैरिकेडिंग है और न ही पर्याप्त चेतावनी संकेत। लोगों का कहना है कि स्थायी पुल का निर्माण जल्द पूरा किया जाए, ताकि हर मानसून में ऐसे हादसों की आशंका खत्म हो सके।










































