Elephant Human Conflict: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से 37 हाथियों का एक नया झुंड शाहडोल पहुंचने के बाद उत्तर शाहडोल वन मंडल में हाथियों की कुल संख्या 62 हो गई है। करीब 3.5 लाख आबादी वाले इस घने इलाके में हाथियों की बढ़ती संख्या से मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा गहरा गया है।शहडोल: मध्य प्रदेश के उत्तर शहडोल वन मंडल में इन दिनों एक बड़ी चुनौती सामने आई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भटककर आए 37 हाथियों के एक नए झुंड ने यहां डेरा डाल दिया है, जिससे इलाके में मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा काफी बढ़ गया है। खास बात यह है कि इस नए झुंड के आने से डिवीजन में हाथियों की कुल संख्या अब 62 पहुंच गई है। यह पूरा इलाका करीब एक लाख हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसके आसपास लगभग 3.5 लाख लोगों की आबादी निवास करती है।
अमूमन बांधवगढ़ से आने वाले हाथी एक-दो दिन में वापस लौट जाते थे, लेकिन इस बार हाथियों का यह दल विपरीत दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे वन विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।गांवों और खेतों से गुजर रहा हाथियों का दल
हाथियों का यह बड़ा झुंड ऐसे इलाकों से गुजर रहा है जहां घनी बस्तियां, गांव और खेत मौजूद हैं। इसके चलते इंसानों और हाथियों के आमने-सामने आने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ गई है। हालांकि, खतरे की यह स्थिति दोनों तरफ से है। इंसानों की जान को तो खतरा है ही, साथ ही जंगलों के किनारे और खेतों में बिछाई गई अवैध बिजली की लाइनें हाथियों के लिए भी काल साबित हो रही हैं। बीते 13 अक्टूबर को इसी क्षेत्र में करंट लगने से एक नन्हे हाथी के बच्चे की मौत भी हो चुकी है, जिसने विभाग की चिंता को और बढ़ा दिया है।वन विभाग की लगातार मॉनिटरिंग
उत्तर शाहडोल वन मंडल की डीएफओ तरुण वर्मा ने बताया कि डिवीजन में पहले से 25 हाथी मौजूद थे और अब बांधवगढ़ से 37 और के आने से इनकी संख्या 62 हो गई है। वन विभाग की टीमें लगातार हाथियों की मूवमेंट पर नजर बनाए हुए हैं और नियमों के मुताबिक सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग बिजली वितरण कंपनी के साथ मिलकर खेतों के किनारे डाली गई अवैध और खतरनाक बिजली लाइनों को हटवाने की कार्रवाई भी कर रहा है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य बिना किसी जनहानि या वन्यजीव को नुकसान पहुंचाए इस स्थिति से निपटना है, जिसके लिए स्थानीय लोगों का सहयोग भी बेहद जरूरी है।








































