अज्ञात कार चालक ठोस मारकर हुआ फरार,108’ की बदहाल व्यवस्था पर फिर उठे सवाल,
समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान? ग्रामीणों का आरोप
एंबुलेंस के इंतजार में युवक की उखड़ी सांसे, आंदोलन की भी दी चेतावनी
ज़िला मुख्यालय से लगे ग्राम बड़ी कुम्हारी का मामला, जांच में जुटी पुलिस
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पदमेश न्यूज़। बालाघाट।मौत सामने थी, जिंदगी बचाने के लिए मदद मांगी गई, एंबुलेंस को बार-बार फोन लगाया गया, लेकिन एम्बुलेंस पहुंचने के बजाय सिर्फ इंतजार मिलता रहा। सड़क पर घायल युवक दर्द से तड़पता रहा और आखिरकार उसकी सांसें थम गईं। मामला जिला मुख्यालय से महज 7 किमी दूर ग्राम पंचायत बडी कुम्हारी से समाने आया है।जहां बीती रात दुर्गा पंडाल समीप आयोजित कार्यक्रम देखने गए एक युवक की अज्ञात तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से मौत हो गई। मृतक का नाम छोटी कुम्हारी निवासी 24 वर्षी महेंद्र पिता ताराचंद बघेले बताया गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि युवक को ठोस करने के बाद चालक कार सहित मौके से फरार हो गया। इधर पर फोर व्हीलर ठोस से युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने उपचार के लिए 108 एंबुलेंस को बार-बार फोन लगाया लेकिन एम्बुलेंस 2 घंटे बाद भी मौके पर नहीं पहुंची, आखिरकार स्थानिक ग्रामीणों द्वारा ट्रैक्टर से घायल युवक को रात्रि करीब 3 बजे उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे अमृत घोषित कर दिया। बताया गया कि अस्पताल लाने के पूर्व ही युवक की समय पर उपचार ना मिलने से मौत हो चुकी थी।
नवदुर्गा का कार्यक्रम देखने गया था युवक, लौटते समय हुआ हादसे का शिकार
प्राप्त जानकारी के अनुसार छोटी कुम्हारी निवासी महेन्द्र उर्फ पप्पू पिता ताराचंद बघेले सोमवार की देर रात नवदुर्गा का कार्यक्रम देखने बडी कुम्हारी गया था। इसी दौरान बड़ी कुम्हारी के मोड़ पर किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में महेन्द्र गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर पड़ा रहा। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए सक्रिय हुए। ग्रामीणों के अनुसार, सबसे पहले एंबुलेंस को फोन किया गया, ताकि घायल को तत्काल उपचार मिल सके। लेकिन आरोप है कि काफी इंतजार के बाद भी एंबुलेंस घटनास्थल पर नहीं पहुंची।
एंबुलेंस का इंतजार, सड़क पर थम गई जिंदगी!
ग्रामीणों का कहना है कि घायल युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत थी, लेकिन एंबुलेंस के आने की उम्मीद में समय बीतता रहा। इसी बीच घायल महेन्द्र ने दम तोड़ दिया। देर रात करीब 3 बजे उसे जिला अस्पताल बालाघाट लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब युवक गंभीर रूप से घायल था, तब उसे समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंची? क्या सूचना मिलने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई या फिर सेवा में कहीं कोई ऐसी चूक हुई, जिसकी कीमत एक परिवार को अपने जवान बेटे की जान गंवाकर चुकानी पड़ी?
महज 7 किमी दूर नही पहुच सकी एम्बुलेंस?
बीती रात जिला मुख्यालय के समीप हुई इस घटना ने 108 एंबुलेंस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।सवाल यह है कि जिला मुख्यालय से महज 7-8 किलोमीटर दूर यदि आपातकालीन एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच सकती, तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की क्या स्थिति होगी? छोटी कुम्हारी निवासी 26 वर्षीय महेन्द्र उर्फ पप्पू बघेले की मौत ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो युवक की जान बच सकती थी। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश है और ग्रामीणों ने व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस अधिकारी भी नहीं दे सके जवाब
घटना की सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस घटनास्थल पहुंची। एएसआई भुनेश ठाकरे भी मौके पर पहुंचे, लेकिन एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंची, इस संबंध में वे भी कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। पुलिस के अनुसार मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। मंगलवार को परिजनों की मौजूदगी में शव पंचनामा कार्रवाई और पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया।हालांकि, युवक की मौत के मामले में पुलिस जांच कर रही है, लेकिन एंबुलेंस की कथित अनुपलब्धता को लेकर अलग से जवाबदेही तय होना भी जरूरी है। आखिर सूचना किस समय मिली, कॉल किस एंबुलेंस सेवा को किया गया, संबंधित वाहन कहां था और वह घटनास्थल तक क्यों नहीं पहुंचा?,इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं।
पहले भी उठ चुके हैं एंबुलेंस व्यवस्था पर सवाल
बालाघाट में एंबुलेंस की उपलब्धता और समय पर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। इससे पूर्व जिला अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद एक मरीज को एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण कथित तौर पर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक इंतजार करना पड़ा था। अंततः परिजनों को निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करनी पड़ी थी। उस मामले में भी सरकारी एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता और जरूरतमंदों को समय पर सुविधा मिलने पर सवाल खड़े हुए थे।अब छोटी कुम्हारी के महेन्द्र बघेले की मौत के बाद एक बार फिर वही सवाल सामने है—क्या आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा केवल फोन लगाने तक सीमित रह गई है? यदि पहले की घटनाओं से सबक लेकर व्यवस्था में सुधार किया गया होता, तो क्या इस बार स्थिति अलग हो सकती थी? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
घटना पर ग्रामीणों ने जताया आक्रोश, आंदोलन की दी चेतावनी
उक्त घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है, जिन्होंने इस घटना को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण स्पष्ट कर दिया कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो युवक को समय पर उपचार मिल जाता और उसकी मौत नहीं होती।लेकिन 108 के कर्मचारियों की उदासीनता के चलते युवक की मौत हुई है इस मामले मे यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई और व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो यह मामला बड़े विरोध का रूप ले सकता है।ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर घायल युवक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था, मदद के लिए फोन भी किया गया—फिर एंबुलेंस आखिर पहुंची क्यों नहीं? क्या इस सवाल का जवाब महेन्द्र के परिवार को मिलेगा, या यह मामला भी जांच और आश्वासन के बीच दबकर रह जाएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
जो समय पर ना मिले ऐसी सेवा का क्या औचित्य-सहजलाल उपवंशी
अवन्तिबाई लोधी महासभा जिला अध्यक्ष सहजलाल उपवंशी ने बताया कि सरकार यदि एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सुविधा उपलब्ध कराती है, तो उसका लाभ जरूरत के समय मिलना भी सुनिश्चित होना चाहिए। केवल व्यवस्था का प्रचार करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि संकट की घड़ी में सेवा का जमीन पर उपलब्ध होना जरूरी है।हमारी मांग है कि एंबुलेंस के नहीं पहुंचने की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट की जाए और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।क्यो की जो सेवा समय पर ना मिले ,ऐसी सेवा का क्या औचित्य है।हम इस मामले को लेकर आगे तक जाएगे।सम्बधित 108 चालक कर्मचारी के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही करेंगे।
व्यवस्था में नही हुआ सुधार तो करेंगे आंदोलन- संतलाल उपवंशी
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि संतलाल उपवंशी ने बताया कि घटना के बाद एंबुलेंस और डायल 112 को सूचना दी गई थी। उनके अनुसार डायल 112 मौके पर पहुंच गई, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। उपवंशी का कहना है कि यदि एंबुलेंस चालक समय पर बता देता कि वह नहीं आ पाएगा, तो ग्रामीण किसी दूसरे साधन से घायल को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था कर सकते थे। संभव है कि समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बच जाती।उन्होंने कहा कि सरकार जनता को आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था करती है, लेकिन जरूरत के समय यदि वही सुविधा काम नहीं आए तो उसका क्या औचित्य है? ग्रामीणों ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की है। उनका







































