भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोधी समाज का शौर्य महाकुंभ केवल एक सामाजिक सम्मेलन नहीं रहा, बल्कि यह उमा भारती के सियासी तेवरों की वापसी का गवाह बना। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में उमा भारती ने समाज को शेर की संज्ञा देते हुए कहा, ‘अभी तो शेर गुफा में है तो मक्खियाँ भी काट रही हैं, जिस दिन आप हुंकार भरोगे, पूरा जंगल खाली हो जाएगा।’ उमा भारती के इस बयान को समाज की संगठित शक्ति और आने वाले चुनावों में उनके प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
भारत के मन और बुद्धि की आजादी
उमा भारती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को नई आजादी का नाम दिया। उन्होंने तर्क दिया कि 1947 में हमें सिर्फ राजनीतिक आजादी मिली थी, लेकिन भारत का मन, विचार और बुद्धि सही मायने में 2014 में आजाद हुए। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन और तिरंगे के सम्मान के लिए किए गए संघर्षों को इस नई आजादी की बुनियाद बताया।
आरक्षण और तीसरी आजादी का मंत्र
आरक्षण के मुद्दे पर उमा भारती ने देश के सिस्टम पर गहरी चोट की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और एक गरीब मजदूर का बच्चा एक ही स्कूल में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण खत्म करने की बात बेमानी है। उन्होंने इसे सामाजिक समानता के अधिकार के लिए ‘तीसरी आजादी’ की लड़ाई बताया।










































