कंपनियों के लिए बहुत महंगा पड़ रहा AI, इंसानों से ज्यादा हो रहा खर्च

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दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अब इसके बढ़ते खर्च ने कंपनियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई कंपनियों के लिए AI पर होने वाला खर्च अब कर्मचारियों की सैलरी से भी ज्यादा हो गया है। शुरुआत में AI कंपनियां निवेशकों के पैसे से बड़े मॉडल तैयार कर रही थीं, लेकिन अब फंडिंग कम होने के कारण वे लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल रही हैं।

कंपनियों का बजट हुआ पार

टेक कंपनियों में AI के बढ़ते उपयोग का असर उनके बजट पर साफ दिखने लगा है। हाल ही में Uber के CTO प्रवीण नेप्पल्ली नागा (Praveen Neppalli Naga) ने बताया कि 2026 के लिए तय किया गया उनका पूरा AI बजट कुछ ही महीनों में खत्म हो गया। इसकी वजह AI कोडिंग टूल्स, खासकर Claude Code का तेजी से बढ़ता उपयोग है।

छोटे स्टार्टअप भी दबाव में

सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, छोटे स्टार्टअप भी इस दबाव को महसूस कर रहे हैं। getswan.com के CEO Amos Bar-Joseph ने खुलासा किया कि उनकी चार लोगों की टीम का एक महीने का AI बिल करीब 1.13 लाख डॉलर (लगभग 1.06 करोड़ रुपये) पहुंच गया। इससे साफ है कि AI का खर्च छोटे संगठनों के लिए भी बड़ा बोझ बनता जा रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर भी असर

AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियां भी इस समस्या से अछूती नहीं हैं। Nvidia के वाइस प्रेसिडेंट Bryan Catanzaro के अनुसार, उनकी टीम के लिए कंप्यूटिंग का खर्च कर्मचारियों की लागत से कहीं ज्यादा हो गया है। इससे साफ है कि AI का संचालन करना तकनीकी रूप से जितना आसान दिखता है, उतना सस्ता नहीं है।

IT खर्च में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

रिसर्च फर्म Gartner के अनुसार, 2026 में वैश्विक IT खर्च 6.31 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 2025 के मुकाबले 13.5% ज्यादा है। इसमें AI डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर और सब्सक्रिप्शन कॉस्ट शामिल हैं। कंपनियों को अब अपने निवेशकों को यह साबित करना होगा कि AI पर किया गया खर्च उन्हें वास्तविक लाभ दे रहा है।

आम यूजर्स पर भी असर

AI की बढ़ती लागत का असर आम यूजर्स पर भी देखने को मिल रहा है। Anthropic के यूजर्स ने शिकायत की है कि उन्हें अपने सब्सक्रिप्शन प्लान में मिलने वाली टोकन लिमिट जल्दी खत्म हो जाती है। वहीं, कई एडवांस AI टूल्स को अब पेवॉल के पीछे रखा जा रहा है, जिससे आम लोगों की पहुंच सीमित हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, महंगे AI टूल्स का इस्तेमाल अधिकतर अमीर यूजर्स कर रहे हैं, जबकि बाकी लोग कम सक्षम विकल्पों पर निर्भर हैं।

टेक कंपनियां खोज रहीं समाधान

हालांकि, AI कंपनियां इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रही हैं। Google ने हाल ही में नए TPU लॉन्च किए हैं, जो कम बिजली खपत के साथ AI को ट्रेन और रन कर सकते हैं। वहीं OpenAI ने अपना नया मॉडल GPT-5.5 पेश किया है, जो कम टोकन में ज्यादा काम करने में सक्षम है।

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