भारतीय सिनेमा में जब भी आइकॉनिक या खूंखार विलेन्स की बात आती है, तो दिलो-दिमाग में मोगेम्बो से लेकर शाकाल और गब्बर जैसे किरदार आते हैं। कई ऐसे कलाकार रहे, जिन्होंने विलेन बनकर फिल्मी पर्दे पर खूब पॉपुलैरिटी पाई, पर कुछ ने इंडस्ट्री छोड़ दी, तो कुछ गुमनामी में खो गए और कुछ इस दुनिया से चल बसे। अमजद खान और अमरीश पुरी से लेकर प्राण, डैनी डेंजोंगपा, अजीत, प्रेम चोपड़ा और आशुतोष राणा तक ढेरों ऐसे कलाकार रहे, जिन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग के साथ-साथ खूंखार अंदाज और भारी आवाज से विलेन के रूप में दर्शकों के दिलों में भी डर पैदा कर दिया था। ऐसे ही एक विलेन की कहानी आज ‘संडे सिनेमा’ के स्पेशल सेगमेंट में आपको बता रहे हैं। इनका नाम है डैन धनोआ, जिन्होंने 80 से लेकर 90 के दशक तक फिल्मी पर्दे पर खूब विलेन के रोल निभाए। इन्हें हिंदी सिनेमा का ‘आखिरी स्टार विलेन’ भी माना जाता है। लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि डैन धनोआ ने फिर अचानक ही फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ एक्टिंग छोड़ दी और मर्चेंट नेली में सेलर बन गए।
जिन लोगों ने अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘मर्द’ देखी है, तो उसमें डैन धनोआ को जरूर देखा होगा। उसमें डैन धनोआ ने विलेन का रोल किया था। घोड़े पर बैठकर डैन धनोआ एंट्री मारते हैं और बोलते हैं- मैं हूं जनरल डायर का बेटा डैनी। इसी डायलॉग और किरदार ने डैन धनोआ को रातोंरात मशहूर कर दिया था। इसके बाद उनके पास फिल्मों के ऑफर्स की लाइन लग गई थी। हालांकि, डैन धनोआ के पिता एक्टिंग के सख्त खिलाफ थे। वह चाहते थे कि बेटा मां की तरह डॉक्टर बने, पर डैन धनोआ एक्टर भी नहीं बनना चाहते थे। वह पढ़ाई पूरी करने के बाद मर्चेंट नेवी में चले गए। फिल्मों में आना बस एक इत्तेफाक था। कैसे वह फिल्मों में आए थे, यह भी इस स्पेशल में बताएंगे।डैन धनोआ 28 फरवरी, 1959 को पंजाब के जालंधर में सिख परिवार में पैदा हुए थे और उनका असली नाम इंद्रप्रीत सिंह धनोआ है। हालांकि, फिल्मों में आने के बाद वह डैन धनोआ के नाम से मशहूर हो गए। डैन धनोआ के पिता मेजर जनरल सरदार सिंह धनोआ थे, और मां कैप्टन डॉ. परमजीत कौर धनोआ। वो आर्मी में डॉक्टर थीं। इस कारण डैन धनोआ को शुरुआत से ही अनुशासन और कड़ी मेहनत का गुण विरासत में मिला था।फिल्मों की बात करें, तो डैन धनोआ गलती से इस लाइन में आ गए थे। एक इंटरव्य में डैन धनोआ ने बताया था कि उस वक्त ज्यादा नौकरियां नहीं थीं, तो उन्होंने मॉडलिंग शुरू कर दी। हालांकि, तब भी दूर-दूर तक उनके दिमाग में फिल्मों में जाने का ख्याल भी नहीं था। लेकिन साल 1984 की बात है। एक्टर फिरोज खान ने अपनी सिल्वर जुबली हिट फिल्म ‘कुर्बानी’ के लिए एक पार्टी रखी थी, और उसी में डैन धनोआ भी थे। उन पर फिरोज खान की नजर पड़ी, तो लुक्स और पर्सनैलिटी से प्रभावित हो गए।फिरोज खान ने उन्हें फिल्म ‘जानबाज’ में साइन किया। डैन धनोआ को एक्टिंग नहीं आती थी, तो एक्टिंग वर्कशॉप कराई और लुक टेस्ट भी लिया। हालांकि, वह फिल्म किसी वजह से बंद हो गई। डैन धनोआ को डैन नाम भी फिरोज खान ने ही दिया था। और फिर जब साल 1986 में ‘जानवर’ फिल्म दोबारा बननी शुरू हुई, तो उसमें डैन धनोआ को कोई रोल नहीं मिला। इस तरह फिरोज खान और डैन धनोआ के रास्ते अलग हो गए।










































