टोक्यो: मंगलवार को नई दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। यह बैठक दो साल के लंबे इंतजार के बाद आयोजित की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी विदेश नीति जिम्मेदार है। उनका कहना है कि जब से ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बने हैं, क्वाड गठबंधन लड़खड़ा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता से हटाकर पश्चिमी गोलार्ध और मध्य पूर्व की ओर रुख कर लिया है।
अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक के मुंह मोड़ा
फरवरी में इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के साथ ही अमेरिका ने अपने सैन्य बेड़े को इंडो-पैसिफिक से हटाकर मध्य पूर्व में तैनात कर दिया। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए अमेरिकी सैन्य अभियान एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिकी सेना ने अपने चार महत्वपूर्ण हथियारों से आधे से अधिक भंडार का इस्तेमाल कर दिया। इससे एशिया में अमेरिका के सहयोगी देश परेशान हो गए, क्योंकि उन्हें लगने लगा कि युद्ध की स्थिति में वे अब अमेरिका से सैन्य सुरक्षा की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।ट्रंप की विदेश नीति ने क्वाड को दिया झटका
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ दोस्ती की कोशिश करनी शुरू कर दी। दोनों देशों ने पहले व्यापार समझौते किए और आपसी मेल-मिलाप को बढ़ाया। इसके बाद ट्रंप ने चीन का दौरा कर संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश की। ट्रंप के इस कदम ने क्वाड देशों को बड़ा झटका दिया। क्वाड का गठन ही इंडो-पैसिफिक में चीन की आक्रामकता के खिलाफ किया गया है। लेकिन, जब क्वाड का सबसे मजबूत सहयोगी ही चीन के साथ दोस्ती कर ले, तब इस गठबंधन का कोई मतलब नहीं रह जाता है। अमेरिका-चीन की दोस्ती ने क्वाड के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जापानी एक्सपर्ट बोले- अमेरिका ने क्वाड को कमजोर किया
अल जजीरा से बात करते हुए जापान इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल अफेयर्स की विश्लेषक उमी अरिगा ने कहा, “यह मूल रूप से नुकसान को कम करने का प्रयास है।” उन्होंने कहा, “क्वाड की मंगलवार की बैठक समूह के अप्रासंगिक होने से पहले शिखर सम्मेलन की तारीख पर सहमत होने का एक प्रयास है।” अरिगा ने तर्क दिया कि नेतृत्व की कमी और वाशिंगटन की अधिक उदासीन भूमिका ने अंततः क्वाड की रणनीतिक एकजुटता को कमजोर कर दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का जिक्र करते हुए कहा, “2025 में कोई नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं हुआ। ट्रंप ने कभी इसमें भाग नहीं लिया, और न ही जापान की ताकाइची ने। शीर्ष स्तर पर यह समूह एक वर्ष से अधिक समय से नेतृत्वहीन रहा है।”









































