5 साल में बनी 39 मिनट की द एलिफेंट व्हिस्परर्स:डॉक्यूमेंट्री में दिखी इंसान-जानवरों की बॉन्डिंग, शूटिंग से ऑस्कर विनिंग फिल्म तक का सफर..

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भारत की फिल्म ‘द एलिफेंट व्हिस्परर्स’ को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म का ऑस्कर अवॉर्ड मिला है। इस फिल्म की डायरेक्टर कार्तिकी गोंजाल्विस और प्रोड्यूसर गुनीत मोंगा हैं। 39 मिनट की इस शार्ट फिल्म में इंसान और जानवरों के बीच की बॉन्डिंग को दिखाया गया है।

फिल्म की कहानी दक्षिण भारत के कपल बोमन और बेली की है, जो एक रघु नाम के अनाथ छोटे हाथी की देखभाल करते हैं। इसे ओरिजनली तमिल भाषा में बनाया गया। 8 दिसंबर 2022 को नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम की गई थी।

पांच सालों में शूट हुई थी फिल्म, कुल 450 घंटों के फुटेज कैप्चर हुए
‘द एलिफेंट व्हिस्परर्स’ शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री है। इस कैटेगरी की फिल्में बनाने के लिए रियल लोगों को फॉलो किया जाता है। फिल्म की डायरेक्टर कार्तिकी ने पांच साल दो लोगों और बेबी एलिफेंट को फॉलो किया। ये दो लोग- बोमन और बेली थे।

उन्होंने बेबी एलिफेंट- रघु के साथ जो भी पल बिताए वो सब कैप्चर किए गए। रघु के शॉट कैप्चर करने के लिए उसे कोकोनट मिक्सचर खिलाया जाता था। वो खुशी से झूम उठता था और वो मोमेंट्स रिकॉर्ड कर लिए जाते थे। साढ़े चार सौ घंटों के फुटेज कैप्चर हुए।

नेचर कंजर्वेशन का महत्व भी समझाया
फिल्म तमिलनाडु के मदुमलाई रिजर्व में सेट है। इसमें लोकेशन की प्राकृतिक सुंदरता भी दिखाई गई है। साथ ही नेचर के प्रति आदिवासियों का प्यार दिखाया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे आदिवासी प्रकृति को सहेजे हुए हैं। ये फिल्म पर्यावरण संरक्षण की भारतीय संस्कृति और परंपरा को भी दिखाती है

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