- टी20 वर्ल्ड कप से पहले शुभमन गिल को टीम से बाहर करना हो या फिर संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना, ऐसे कुछ फैसले गौतम गंभीर ने लिए जिसके लिए उनकी खूब आलोचना हुई, लेकिन रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली जीत ने उस सारे सवालों और उन्हें पूछने वाले आलोचकों की जुबान बंद कर दी। अब गंभीर एक वर्ल्ड कप विनिंग टीम के कोच हैं और उनकी कोचिंग में टीम व्हाइट बॉल क्रिकेट में दो आईसीसी ट्रॉफी जीत चुकी है, लेकिन इन उपलब्धियों से उनकी रेड बॉल क्रिकेट की नाकामी छुपाई नहीं जा सकती।
- न्यूजीलैंड और अफ्रीका ने घर पर रौंदा
- बांग्लादेश के खिलाफ भले ही गंभीर की कोचिंग में रेड बॉल क्रिकेट में टीम इंडिया ने विजयी आगाज किया हो, लेकिन सच यह भी है कि न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका ने पहली बार घर पर भारत का सूपड़ा साफ किया। न्यूजीलैंड ने पहली बार 3-0 से और साउथ अफ्रीका ने 2-0 से टेस्ट सीरीज अपने नाम की थी। इस दाग को शायद ही कोई भूल पाएगा। अब रेड बॉल क्रिकेट में अपनी असफलता को लेकर पहली बार गंभीर ने चुप्पी तोड़ी है।
- वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद गंभीर ने आजतक से बातचीत करते हुए रेड बॉल क्रिकेट को लेकर आलोचकों को जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया बदलाव के दौरा से गुजर रही है। उन्होंने कहा ‘अगर लोगों को बदलाव वाला फेज नहीं दिख रहा है तो उसमें मेरी गलती नहीं है। टेस्ट क्रिकेट आसान नहीं है। मौजूदा टीम में 22-23 साल के लड़के हैं। टेस्ट क्रिकेट में आप बच्चों को डेवलप होने का टाइम देते हो। आप देखिए कि किस तरह के खिलाड़ी रिटायर हुए। उनको 6 महीने में रिप्लेस करना आसान नहीं है। छोटे बच्चों का सपोर्ट करना, मेरी जिम्मेदारी है। टीम और देश के तौर पर अगर हम इन्हें बैक नहीं करेंगे तो यह बदलाव का दौर और लंबा खींचेगा। व्हाइट बॉल क्रिकेट में हमें कभी भी संदेह नहीं था।
गंभीर किन खिलाड़ियों की कर रहे हैं बात
गंभीर की कोचिंग के बाद रोहित शर्मा, विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा और रविचंद्रन अश्विन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने इस फॉर्मेट को अलविदा कह दिया है। इन दिग्गजों की कमी पूरी कर पाना सच में आसान नहीं है। वहीं व्हाइट बॉल क्रिकेट में गौतम गंभीर की कोचिंग में 2025 में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी और अब टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया।










































