150 साल बाद एमपी में दिखेंगी जंगली भैंसें, असम से लाकर कान्हा अभ्यारण में किए गए शिफ्ट

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बालाघाट: भारत में वन्यजीवों को बचाने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व के सुपखार और टोपला इलाकों में अब एशियाई जंगली भैंसों को बसाया गया है। उप-वयस्क जंगली भैंसों को छोड़ने के बाद, जिनमें एक नर भी शामिल है, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह महत्वपूर्ण स्थानांतरण मध्य प्रदेश और असम सरकारों के बीच एक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के जंगलों का पारिस्थितिक संतुलन बहाल करना है।

50 भैंसों को लाने का लक्ष्य

‘संस्थापक आबादी’ के तौर पर कुल 50 भैंसों को लाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस सीजन में आठ भैंसों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से, काजीरंगा और कान्हा के वरिष्ठ अधिकारियों तथा अनुभवी पशु चिकित्सकों की देखरेख में की जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस बात पर जोर दिया कि इस पहल का उद्देश्य राज्य की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाना है और साथ ही स्थानीय पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा देना है।

असम सीएम का जताया आभार

उन्होंने इस स्थानांतरण को संभव बनाने के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के प्रति आभार व्यक्त किया और बताया कि दोनों नेताओं के बीच पहले भी राज्य में जंगली भैंसों और गैंडों को लाने की संभावना पर चर्चा हुई थी।

100 वर्षों के बाद एमपी आए जंगली भैंसें

सीएम मोहन यादव ने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण में मध्यप्रदेश अग्रणी, आज कान्हा टाइगर रिजर्व, बालाघाट में असम से लाए गए 4 जंगली भैंसों को छोड़कर उनके पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ किया। 100 वर्षों से अधिक समय के बाद मध्य प्रदेश की धरती पर जंगली भैंसों का आगमन हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक अद्भुत अवसर है। कुल 50 जंगली भैंसों के पुनर्वास की योजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विलुप्त प्रजातियों के वन्यजीवों को मप्र में वापस लेकर आ रही है। मैं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा का इस अभियान में सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता हूं।

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