भारत आ रहे वियतनाम के राष्ट्रपति, ₹5,800 करोड़ की होगी ब्रह्मोस डील! मित्र रूस ने भी कहा ‘हां’

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नई दिल्ली: वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम अगले हफ्ते भारत यात्रा पर आ सकते हैं। उनकी इस यात्रा का मकसद भारत के साथ सामरिक और सैन्य साझेदारी को और आगे बढ़ाना है। लेकिन, उनकी इस यात्रा का सबसे बड़ा लक्ष्य करीब ₹5,800 करोड़ ($700 मिलियन डॉलर) की ब्रह्मोस मिसाइल की प्रस्तावित डील है। इस मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से यह बातें सामने आई हैं।

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान वह ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के अलावा भी कई और तरह के हथियार और रक्षा उपकरणों को खरीदने की बात को आगे बढ़ा सकते हैं। हमारे सहयोगी अखबार ET की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित डील में ब्रह्मोस के एंटी-शिप वर्जन शामिल हो सकते हैं, जिससे वियतनाम को अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।मालदीव को ब्रह्मोस बेचने पर रूस भी सहमत

  • भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल को रूस के साथ मिलकर संयुक्त रूप से विकसित किया है।
  • रूस भारत का तो भरोसेमंद मित्र है ही, वियतनाम का भी एक बहुत पुरानी सहयोगी है।
  • रिपोर्ट के अनुसार रूस ने वियतनाम को भारत के अत्याधुनिक स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल बेचने का पूर्ण समर्थन कर दिया है और उसे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।

वियतनाम के सबसे ताकतवर नेता हैं तो लाम

  • तो लाम को कई दशकों बाद वियतनाम का सबसे ताकतवर नेता माना जाता है।
  • वह इसी महीने हुए चुनाव के बाद राष्ट्रपति बने हैं और वह वियतनाम कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं।
  • परंपरागत तौर पर वियतनाम में यह दोनों पद अलग-अलग लोगों के पास रहता था।
  • इस तरह से वहां के सत्ता समीकरण में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है और तो लाम सर्वेसर्वा बनकर उभरे हैं।

भारत और वियतनाम की रणनीतिक साझेदारी

जून 2022 में दोनों देश एक ‘ज्वाइंट विजन स्टेटमेंट ऑन इंडिया-वियतनाम डिफेंस पार्टनर्शिप टुवर्ड 2030’ के लिए भी सहमत हुए थे और म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट पर एक एमओयू भी साइन किया था।

यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रपति बनने के बाद वह चीन गए और उसके तुरंत बाद भारत आ रहे हैं।

भारत और वियतनाम के संबंधों में तब और मजबूती आनी शुरू हुई, जब 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वियतनाम यात्रा पर पहुंचे। यहीं से दोनों में व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) की शुरुआत हुई।

तो लाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी के एक दशक पूरे होने पर भारत आने वाले हैं।

भारत और वियतनाम के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग व्यापक रणनीतिक साझेदारी के मुख्य आधार है।

यह साझेदारी 2009 के रक्षा सहयोग पर मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग और 2015 के रक्षा सहयोग के संयुक्त दृष्टिकोण पर आधारित है।

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