अब वो दिन ज्यादा दूर नहीं, जब आप भारत में D2M (Direct-to-mobile) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर पाएंगे। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि Tejas (तेजस) नेटवर्क्स के डिवाइस ने डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M) ब्रॉडकास्टिंग के लिए मल्टी मिनिस्ट्री बैक्ड लैब और फील्ड ट्रायल पास कर लिए हैं। एक्सचेंज4मीडिया की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, टेस्टिंग में तेजस के MarkOne D2M हैंडसेट का उपयोग किया गया था, जो 470-582MHz स्पेक्ट्रम बैंड के भीतर ATSC 3.0 स्टैंडर्ड पर काम करता है।
क्यों हुआ ट्रायल का मकसद?
लैब में D2M टेकन्लॉजी की हुई जांच का मुख्य मकसद यह देखना था कि सिग्नल भेजने वाली मशीन यानी ट्रांसमीटर सही तरीके से काम कर रही है या नहीं और क्या यह नई तकनीक हमारे फोन के मौजूदा नेटवर्क जैसे 4G और 5G के काम में कोई रुकावट तो नहीं डाल रही। रिपोर्ट के अनुसार, D2M सिग्नल ने 2G, 3G, 4G और 5G सेवाओं सहित पुराने और वर्तमान नेटवर्क में कोई हस्तक्षेप या रुकावट नहीं डाली। इस टेस्टिंग से ये भी पता चल गया कि नई तकनीक वाले उपकरण जैसे रिसीवर, डोंगल, स्मार्टफोन और होम गेटवे पूरी तरह मजबूत और सही हैं। साथ ही, यह भी पता चल गया है कि वे इस सिग्नल को बिना किसी रुकावट के पकड़ सकते हैं।













































