भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) भोपाल के डाक्टरों ने जबड़े के कैंसर के एक जटिल मामले में थ्री-डी प्रिंटिंग तकनीक की मदद से सफल सर्जरी की है। मरीज के दाहिने निचले जबड़े में बड़ा ट्यूमर था। डाक्टरों ने ट्यूमर निकालने के बाद मरीज के बायें पैर की फाइबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार किया। डाक्टरों ने चेहरे की बनावट और दांतों के सही मिलान को बनाए रखने के लिए पहले से तैयार थ्री-डी माडल और सर्जिकल गाइड का इस्तेमाल किया।
मरीज के थ्री-डी मॉडल पर मॉक सर्जरी की गई
खास बात यह रही कि ऑपरेशन से पहले मरीज के थ्री-डी मॉडल पर मॉक सर्जरी की गई। इसके लिए मरीज की सीटी स्कैन रिपोर्ट के आधार पर कंप्यूटर पर जबड़े की थ्री-डी तस्वीर तैयार की गई। फिर तय किया गया कि ट्यूमर को कहां से निकालना है और पैर की हड्डी को किस आकार में काटकर जबड़े में लगाना है।
ऑपरेशन के एक महीने बाद जांच में हड्डी सामान्य रूप से जुड़ती मिली। चेहरे की बनावट भी काफी हद तक सामान्य हो गई। दांतों का मिलान सही है। वह सामान्य रूप से खाना चबा रहा है और बोल पा रहा है।
ट्यूमर निकालने की जिम्मेदारी शल्य आंकोलाजी विभागाध्यक्ष डा. विनय कुमार के नेतृत्व में निभाई गई। वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग और थ्री-डी प्रिंटिंग का काम ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के डा. बाबूलाल सोनी और आर्थोपेडिक्स के डा. सौरभ कुमार सिन्हा ने संभाला। पुनर्निर्माण सर्जरी प्लास्टिक सर्जरी टीम के डा. दीपक कृष्णा और डा. राहुल डुबेपुरिया ने की।







































