Asian Para Games: दीप्ति जीवनजी ने जीता गोल्ड, टेबल टेनिस में भारत ने जीते चार ब्रॉन्ज मेडल

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भारत की दीप्ति जीवनजी ने एशियाई पैरा खेलों की महिलाओं की 400 मीटर T20 स्पर्धा के फाइनल में 56.36 सेकंड के गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। दीप्ति ने नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। वहीं, पैरा टेबल टेनिस में भारत को चार ब्रॉन्ज मेडल मिले।स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारत की दीप्ति जीवनजी ने एशियाई पैरा खेलों की महिलाओं की 400 मीटर T20 स्पर्धा के फाइनल में 56.36 सेकंड के गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। दीप्ति ने नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। वहीं, पैरा टेबल टेनिस में भारत को चार ब्रॉन्ज मेडल मिले, जिसकी शुरुआत महिला एकल क्लास 4-5 के सेमीफाइनल में भाविना पटेल ने की।

दीप्ति जीवनजी (TOPS एथलीट) ने 56.36 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता और एक नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। दीप्ति ने सफलतापूर्वक अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखा। उन्होंने 2022 के 56.59 सेकंड के समय में सुधार करते हुए 2026 में 56.36 सेकंड का समय निकाला। यानी 0.23 सेकंड का सुधार किया।

टेबल टेनिस में चार ब्रॉन्ज

पैरा टेबल टेनिस में भारत ने तीन ब्रॉन्ज मेडल जीते। भाविना पटेल ने महिला सिंगल के क्लास 4-5 में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद सोनल बेन पटेल ने महिला सिंगल के क्लास-3 में कांस्य पदक अपने नाम किया। थोड़ी देर बाद सहाना ने महिला सिंगल के क्लास-9 में ब्रॉन्ज मेडल जीता। प्राची पांडे ने भी क्लास-6 में ब्रॉन्ज मेडल जीता। पैरा टेबल टेनिस में भारत ने अभी तक चार मेडल जीत लिए हैं। दूसरे दिन मिले एक गोल्ड और चार ब्रॉन्ज की मदद से भारत की मेडल संख्या कुल 19 पहुंच गई है।मुश्किलों भरा रहा दीप्ति का सफर

तेलंगाना की युवा एथलीट दीप्ति जीवनजी ने पैरा-एथलेटिक्स की दुनिया में अपनी एक खास पहचान बनाई है। बौद्धिक अक्षमता (intellectual impairment) से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, जीवनजी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी काबिलियत साबित की है। 15 साल की उम्र में, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के कोच एन. रमेश ने एक राज्य-स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दौरान उन्हें पहली बार देखा।

उनकी क्षमता को पहचानते हुए, रमेश ने उन्हें अपने संरक्षण में लिया और प्रशिक्षण देना शुरू किया। पैरा-एथलेटिक्स में जीवनजी के सफर की शुरुआत 2019 में हांगकांग में आयोजित ‘एशियन यूथ चैंपियनशिप’ से हुई, जहां उन्होंने कांस्य पदक (bronze medal) जीता। अपनी बौद्धिक अक्षमता के कारण, उन्हें अपनी उम्र की अन्य लड़कियों की तरह अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई होती है, फिर भी जीवनजी अपने खेल में बेहतर करने के लिए पूरी तरह दृढ़ रहीं।

उन्होंने कड़ी मेहनत से प्रशिक्षण जारी रखा और 2019 से 2022 के बीच एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) द्वारा आयोजित कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। उनकी मेहनत तब रंग लाई जब उन्होंने गुवाहाटी में आयोजित ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2020’ में 100 मीटर और 200 मीटर, दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक (gold medal) जीते।

जीवनजी की सफलता का सिलसिला ‘नेशनल जूनियर एंड यूथ चैंपियनशिप’ में भी जारी रहा, जहां उन्होंने कई पदक जीते। उनकी इन उपलब्धियों ने उन्हें ‘खेलो इंडिया एथलीट’ का दर्जा दिलाया। जीवनजी की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘एशियन पैरा गेम्स 2023’ में रही, जहां उन्होंने गेम्स रिकॉर्ड और एशियन रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया।

इसके बाद, 2024 की ‘वर्ल्ड चैंपियनशिप’ में उन्होंने 55.07 सेकंड का समय निकालकर एक नया विश्व रिकॉर्ड (World Record) बनाया। उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें स्वर्ण पदक मिला, जिसने पैरा-एथलेटिक्स की दुनिया में एक उभरते हुए सितारे के रूप में उनकी जगह पक्की कर दी।

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